लगातार 25 साल मिली देश को स्थिर सरकार, छठी बार दोहराने का मौका, युवाओं पर फोकस

नई दिल्ली : भारत में 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव के बाद से अब तक, 71 सालों के काल खंड में, इस वर्ष 18वींं बार लोकसभा के चुनाव होने जा रहे हैं. जाहिर है, इस दौरान देश ने मध्यावधि चुनाव भी देखे. वहीं, प्रधानमंत्री पद का शपथ-ग्रहण 23 बार हुआ. जाहिर है, एक लंबा काल खंड ऐसा भी रहा, जब केंद्र में पांच साल तक काम करने वाली सरकार नहीं रही. खास कर वर्ष 1989 से 1999 के दौरान. इस दौरान देश राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा था. तब 10 साल में पांच बार लोकसभा चुनाव हुए. दो बार दो-दो वर्ष में चुनाव कराये गये. एक बार करीब एक वर्ष बाद ही चुनाव हुए. देश में अस्थिरता का यह दौर 1989 के चुनाव से शुरू हुआ. कांग्रेस को 1989 के चुनाव में महज 197 सीटें मिली थीं. तब जनता दल के विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी, लेकिन एक वर्ष के अंदर ही जनता दल में फूट पड़ गयी और पार्टी से अलग हुए चंद्रशेखर कांग्रेस के सहयोग से पीएम बने. हालांकि, उनकी सरकार ज्यादा नहीं चल सकी और 1991 में लोकसभा चुनाव कराये गये. इस चुनाव में कांग्रेस फिर बहुमत हासिल नहीं कर सकी. उसे 232 सीटें मिलीं. लिहाजा, पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व में उसने अल्पमत सरकार बनायी, जो पूरे पांच वर्ष चली. वर्ष 1996 में हुए चुनाव में भाजपा 161 सीट के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा ने केंद्र में सरकार बनायी, पर यह सरकार सिर्फ 13 दिन ही चल सकी. कांग्रेस ने सरकार बनाने से इंकार कर दिया और जनता दल को सरकार बनाने में बाहर से समर्थन दिया. एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व में सरकार बनी, जो मुश्किल से एक वर्ष चली. इसके बाद इंद्रकुमार गुजराल पीएम बने, लेकिन उनकी सरकार भी एक वर्ष से ज्यादा नहीं चल सकी. वर्ष 1998 में एकबार फिर देश में आम चुनाव कराने पड़े. भाजपा एक बार फिर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 दलों के समर्थन से साझा सरकार बनायी. उनकी सरकार 13 महीने ही चल पायी. वर्ष 1999 में फिर से चुनाव हुए. इस बार भी किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत तो नहीं मिला, पर देश में स्थिर साझा सरकार का एक दौर शुरु हो गया. भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी. वाजपेयी एकबार फिर देश के प्रधानमंत्री बने. इस सरकार ने पांच वर्ष का अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा किया और ऐसा करनेवाली वह देश की पहली साझा सरकार बनी. यहीं से केंद्र में स्थिर सरकार का युग शुरू हुआ, जो अब तक जारी है. 1999 से 2019 तक, पांच बार हुए लोकसभा चुनाव में देश को स्थिर सरकार मिली. इसमें तीन बार भाजपा (एक बार अटल बिहारी वाजपेयी और दो बार नरेंद्र मोदी) और दो बार कांग्रेस (डॉ मनमोहन सिंह) की सरकार बनी. एक बार फिर जनता केंद्र के लिए सरकार चुनेगी. यह स्थिर सरकार होगी, यह उम्मीद सभी को है. इस बार युवा वोटरों पर ज्यादा फोकस है.

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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