तेरापंथ भवन में संतो का स्वागत

भीतर की आसक्ति को कम करता है त्याग -मुनि प्रशांत

राउरकेला (वर्धमान जैन): मुनि प्रशांत कुमार जी मुनि कुमुद कुमार जी के तेरापंथ भवन में आगमन पर समाज ने मुनिद्वय का स्वागत समारोह का आयोजन किया। जनसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा- स्वागत संतो का नही त्याग का हो रहा है। भारतीय संस्कृति त्यागप्रधान रही है। त्यागी का सम्मान करना हमारी गरिमामयी संस्कृति का प्रतीक है। जीवन में संयम – त्याग को महत्व दें। त्याग से हमारे भीतर की आसक्ति कम होती है। वैराग्यता का भाव जागृत होता है। व्रती जीवन से कितनो को प्रेरणा मिलती है। संतो को लोग त्याग की भेंट चढ़ाते है। साधु – संतो को नोट नही, वोट नही, प्लोट नही आपके जीवन की खोट चाहिए। बुरी आदतो का त्याग करना ही साधु का सबसे बड़ा स्वागत है। साधु श्रद्धा के फूल को स्वीकार करते हैं। साधु का आगमन प्रसन्नता का हेतु बनता है।

साधु का जीवन जीवंत प्रेरणा देता हैं। बाहर की सुंदरता – स्वच्छता अच्छी होती है उससे ज्यादा भीतर की स्वच्छता – सुंदरता जरूरी है। मन को साफ बनाए जिससे भीतर मे भगवान प्रतिष्ठित होगे। जहां जीवन में सरलता होती है वहां मन स्वच्छ हो जाता है। सरल मन से हमारी गति भी सरल बन जाती है। हम अपने भीतर को देखें जिससे हमारे अवगुण दूर हो सकें। रहें भीतर जिए बाहर आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा दिया हुआ शांत, सुखी जीवन का रहस्य है। अपनी आत्मा के लिए मैने क्या किया व्यक्ति ये प्रश्न अपने आप से करे एवं समाधान भी खुद से लें।

मुनि कुमुद कुमार जी ने कहा – श्रावक का जीवन आदर्श का होता है। श्रावक का आचार, विचार, व्यवहार का प्रभाव दूसरो पर होता है। हमारे जीवन मे निर्मलता, गति शीलता एवं उपयोगिता होनी चाहिए। जैन साधु का त्यागी जीवन विश्व को नई राह दिखा रहा है। श्रावक की जीवनशैली संयमित होती है। संयम एवं सादगी भावों को उच्च एवं शुद्ध बनाती है। हमारा जीवन स्वार्थ भावना से ऊपर उठकर परार्थ एवं परमार्थ का बनता है तो समाज का विकास होता है। श्रावक को भगवान महावीर ने बहुत महत्व दिया। तीर्थ की उपमा से उपमित किया। राजगांगपुर एवं राउरकेला का श्रावक समाज संतो की सेवा में जागरूक है ये जागरुकता बढ़ती रहे।

कार्यक्रम का प्रारम्भ मुनिश्री के मंगलमंत्रोच्चार से हुआ। सभा अध्यक्ष छगनलालजी जैन, तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष हितेश बोथरा, महिला मण्डल अध्यक्षा सरोज गोलछा, ललिता भंसाली, रुपचंदजी बोथरा, ज्ञानशाला के ज्ञानार्थी, तेयुप परिवार, महिला मण्डल, श्रीमति स्नेहलता चोरडिया, कमल बैद ने गीत एवं व्यक्तव्य के द्वारा मुनिदय का स्वागत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मधु कोठारी ने किया।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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