लाल दूषित पानी पीने को मजबूर झरेर के ग्रामवासी

लाल दूषित पानी पीने को मजबूर झरेर के ग्रामवासी

श्योपुर: महात्मा गांधी सेवा आश्रम और डब्ल्यू एच एच के सहयोग से संचालित खाद्य सुरक्षा एवं पोषण विविधता कोविड-19 राहत कार्यक्रम के अंतर्गत आज ग्राम झरेर में प्रवासी मजदूरों के मुखिया ओं के साथ बैठक रखी गई। जिसमें कोविड-19 राहत कार्यक्रम और सरकार द्वारा चलाई जा रही शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए सभी से लोक डाउन में किन किन मुसीबतों का सामना करना पढ़ था और अब क्या मुश्किलें आ रही है इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रकाश आदिवासी द्वारा बताया गया कि जब से पलायन से लौट कर आए हैं तब से घर पर ही बैठे हैं। पंचायत द्वारा कोई रोजगार नहीं दिया गया है। सरकार द्वारा घोषणा की गई थी कि सभी प्रवासी मजदूरों के खातों में एक हजार रुपए डाले जाएंगे लेकिन अभी तक एक भी रुपया हमारे खाते में नहीं पहुंचा है और ना ही लोकडाउन में किसी के द्वारा हमें कोई सुविधा नहीं मिली है।

पीने का शुद्ध पानी भी हमें उपलब्ध नहीं हो रहा है सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन उनको धरातल पर नहीं देखा जा रहा है। हर गांव में नल जल योजना का प्रावधान है। लेकिन झरेर गांव में अभी तक नल जल योजना शुरू नहीं की गई है। एक बोरिंग से पूरा गांव पानी भर कर पीता है लेकिन 8 दिन से उस बोरिंग में भी लाल पानी निकल रहा है जिसके कारण बहुत समस्या आ रही हैं पानी को पीने योग्य बनाने के लिए कुछ घंटों के लिए रखा जाता है ताकि लाल मिट्टी नीचे जम जाए और फिर ऊपर के पानी को हम लोग उपयोग करते हैं। यह सभी जानकारी झरेर के ग्रामवासी द्वारा महात्मा गांधी सेवा आश्रम के कार्यकर्ता राधावल्लभ जांगिड़ और हबीब खान के साथ साझा की गई है।

मध्यप्रदेश श्योपुर से आनंद सिंह यादव की रिपोर्ट Yadu News Nation

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