भ्रष्टाचार का गढ़ बना वन परिक्षेत्र कार्यालय पाण्डुका

भ्रष्टाचार का गढ़ बना वन परिक्षेत्र कार्यालय पाण्डुका

● महिलाओ के नाम पर फर्जी हाजिरी डाल लाखो का कर गए गबन, अब जिम्मेदार जवाब देने से बच रहे है

गरियाबंद: पांडुका वन परिक्षेत्र पांडुका के अंतर्गत बीते वर्ष 2020- 21 में छिंद खरपतवार उन्मूलन लेनटाना के तहत, वन परीक्षेत्र कार्यालय पांडुका में यह कार्य लगभग 10 बिट में ग्रामीणों की मदद से जंगलों में उगने वाले खरपतवार को काटकर साफ सफाई किया गया ।पूरे कार्य की देखरेख व जिम्मेदारी वन परीक्षेत्र कार्यालय पांडुका के तत्कालीन रेंजर संजीत मरकाम के द्वारा बिट गार्डों की देख रेख मे कराया गया और भुगतान उनके सीधे खाता में माध्यम से कराया गया। जिसमें वन विभाग की मजदूरी के दर तय थी ,पर सबसे हैरानी वाली बात यह है कि इस कार्य में जिन नाम से मस्टररोल में हाजिरी डाला गया ,उसमें महिलाओं का भी हाजिरी था ।जबकि महिलाएं काम पर गया ही नहीं थी । जब ग्रामीणों ने आवाज उठाया तो उन्हे मना बुझा के कुछ लेन देन कर शांत कर दिया गया।सबसे मजेदार बत यह है की ,लेन-देन की भ्रष्टाचार ना हो इसीलिए अब डिजिटल समय में खातों में भुगतान किया जाता है ताकि और पारदर्शिता बने रहे।लेकिन बीट गार्ड और रेंजर साहब की चालाकी से इनके खाता में होने वाले भुगतान को भी भ्रष्टाचार के रंग में रंग दिया गया । ऐसे में बिट गार्ड के भरोसेमंद चौकीदारों ने गांव-गांव में घूमकर उन महिलाओं एवं उन पुरुषों से खाते से पैसा निकलवा कर मांग लिया और सीधा बिट गार्ड के माध्यम ने उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया । बता दें कि जंगलों की साफ सफाई के लिए खरपतवार उन्मूलन इस कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र पांडुका के बिट में करोड़ों रुपए का कार्य कराया गया । पर वन विभाग के भ्रष्टाचार नीति के तहत जंगलों की सफाई तो नहीं हुई पर ,अधिकारी कर्मचारियों की भला हो गया ,क्योंकि जब कार्य चल रहा था उस समय मीडिया की टीम कार्य स्थल पर जाकर मुआयना किया था। जहां पुरुषों के अलावा कार्य में महिलाएं नजर नहीं आई थी ।वही जब खाता के माध्यम से पैसे का भुगतान हुआ तब मामले का खुलासा हुआ ।इन्हीं चीजों को पुख्ता करने के लिए वन परीक्षेत्र कार्यालय में सूचना का अधिकार के तहत जानकारी चाही गई लेकिन चार बार सूचना का अधिकार लगने के बाद भी जानकारी नहीं दिया गया और गोलमोल जवाब देकर आवेदन को गलत बता दिया गया तथा अपीलीय अधिकारी भी जानकारी नहीं दे पाए ।अब आयोग से इसकी शिकायत के लिए आवेदन किया गया। इस मामले के बारे में मीडिया ने कुछ मजदूरों से बात की तो कुछ महिला एवं पुरुष मजदूरों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हमारे खाते से पैसा निकाल कर चौकीदार और बिट गार्ड को दिए हैं। हम लोग तो काम नही किए और न गए हैं ।अपना खाता नंबर देने के एवज मैं हमें कुछ पैसा दिया गया, बिना काम किए जब हमें इतना पैसा मिल गया तो हम शिकायत क्यो करें। ऐसे में ग्रामीणों ने बताया कि विभाग द्वारा करोड़ों की कार्य कराया गया और लाखों की गड़बड़ी की गई है ।कई पुरुष व महिला काम पर नही गय उनके नाम से फर्जी हाजिरी डालकर भुगतान कराया गया और बीट गार्ड और चौकीदार के माध्यम से जो मजदूर काम पर नहीं गए उनके खाते से पैसा निकलवाया और हजम कर लिया। इसकी शिकायत वन मंत्री और प्रधान मुख्य वन संरक्षक से की जाएगी अगर वन विभाग ठोस कार्रवाई नहीं करती तो वन मंडलाधिकारी कार्यालय का घेराव एवं धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ स्टेट हेड उमेश यादव की रिपोर्ट Yadu News Nation

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