32 वां विकास महोत्सव का आयोजन

कर्तृत्व के लिए प्रेरित करता विकास महोत्सव -मुनि प्रशांत

सिलचर (बर्धमान जैन): मुनि श्री प्रशांत कुमार जी, मुनि श्री कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में 32 वां विकास महोत्सव का आयोजन हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा – विकास महोत्सव आचार्य श्री तुलसी के कर्तृत्व के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपने शासनकाल में नये नये आयाम खोले, कार्य किए उसी के आधार पर यह विकास महोत्सव मनाया जा रहा है। इसका नामकरण आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के दूरदर्शी चिंतन का परिणाम है। इसके माध्यम से संघ में नया विकास होता रहें। विकास का अर्थ है आगे बढ़ना प्रगति करना।वि- विवेक पूर्ण कार्य करें।कार्यशीलता निरन्तर बनी रहें। प्रत्येक परिस्थिति में समता बनाए रखना। गुरुदेव श्री तुलसी का जीवन निरन्तर प्रगतिशील रहा। जीवन के अंत तक कार्य में लगे रहें। स्वागत सम्मान बहुत मिला तो विरोध भी बहुत हुआ। उन्होंने समय समय पर प्रेरणा -प्रोत्साहन देने का कार्य किया। प्रवृत्ति एवं निवृत्ति का संतुलन का बोध गुरुदेव श्री तुलसी ने दिया। कार्यकर्ता को कार्य करने की प्रेरणा के साथ नया चिंतन का बोध देते। अलग-अलग माध्यमों से साधु साध्वी के जीवन का विकास किया।संघ का विकास किया। आचार्य श्री तुलसी ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण मानवता के कल्याण में व्यतीत किया। आचार्य श्री तुलसी का जीवन विकास का जीवन था। उन्होंने जागते हुए सपने देखें और उन्हें पूरा किया। समग्र जैन धर्म और मानवता के विकास के लिए कार्य करते थे। उनकेद्वारा किए गए मानवतावादी कार्यो की एक लम्बी श्रृंखला है। आचार्य श्री तुलसी क्रांतिकारी विचारक थे। उनके चिंतन में विकास ही परिलक्षित होता था। विरोधों की परवाह न करते हुए अपनी शक्ति को सकारात्मक कार्यों में लगाए रखा।उनका कहना था कि व्यक्ति चाहे जिस धर्म को माने परन्तु सबसे पहले नैतिक मूल्यों को जीवन में अवश्य अपनाएं।


मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने कहा – आचार्य श्री तुलसी की प्रज्ञा, समयज्ञता, दूरदर्शीता ने संघ में अनेकों नए आयाम स्थापित किए। उन्होंने मानव जाति के उत्थान के लिए लगभग एक लाख किलोमीटर की पदयात्रा कर दुनिया को शांति का संदेश दिया।विकास एवं विरोध दोनों ही आचार्य श्री तुलसी के साथ जुड़े रहे सम्मान एवं अलंकरण से प्रसन्नता नहीं तो विरोध से घबराए नहीं। संयम ग्रहण से लेकर जीवन के अंतिम पल तक कार्य करते रहे एवं जीवंत प्रेरणा संघ को देते रहे। अनुशास्ता न केवल दायित्व से थे अपितु स्वयं जीवन व्यवहार से बने रहे।शुभ भविष्य का चिंतन दिया संघ का,मानव जाति का। नारी जाति के उत्थान के लिए सतत जागरुकता से प्रयास किया जिसका परिणाम आज देख रहे हैं कि धर्मसंघ का महिला समाज देश के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाकर अनेक मुकाम हासिल किए हैं। सिलचर सभा अध्यक्ष नवरतन चौपड़ा ने विचार प्रस्तुत किए। तेरापंथ युवक परिषद् उपाध्यक्ष जितु मरोठी, तेरापंथ महिला मंडल, टीपीएफ अध्यक्ष महावीर बैद, श्रीभूमि सभा मंत्री विवेक लालाणी ने गीत एवं व्यक्तव्य द्वारा गुरुदेव तुलसी के प्रति भावना व्यक्त की। आभार ज्ञापन सभा मंत्री तोलाराम गुलगुलिया ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने किया।संघगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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