बूरे भावों का त्याग करें -मुनि प्रशांत

फारबिसगंज (बर्धमान जैन): आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में आयोजित “अहिंसा परमो धर्म” में उपस्थित श्रद्धालु को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा- आगम में अनेकों ऐसे सूत्र है जो मनुष्य को आत्म कल्याण की ओर आगे बढ़ाते है। हमें आगम के तीन सूत्रों को हमेशा अपने जीवन में अपनाना चाहिए। हमें वोसिरामि, मिच्छामि दुक्कड़म और हमेशा हल्के बनने के भाव को अपने जीवन में लाना चाहिए। हमें उन सभी वस्तु, विचारों का त्याग करें जिनका हमारे जीवन में कोई मूल्य न हो।यानि अनावश्यक बुरे विचार और भावों का त्याग करना चाहिए। वोसिरामि यानि किसी भाव या वस्तु को छोड़ना अथवा त्याग करना। ‘वोसिरामि’ हमें सतपथ का मार्ग दिखाता है। हर श्रावक श्राविका के लिए यह अनिवार्य है की रात्रि में सोने से पूर्व वह 84 लाख योनि से खमत खामणा करे और यह चिंतन अवश्य करें कि मेरे कारण किसी का भी दिल न दुखे। दिल दुखा हो या न ही बुरे भाव आए हो ।अगर ऐसा हुआ हो तो अपनी आत्मा की शुद्धि करते हुए उस जीव से मिच्छामी दुक्कड़म ले लेवे।अगर किसी ने कुछ कह दिया हो तो उन भावों को लेकर ना बैठे। उस विचार के साथ एक रात्रि बीतने पर सौ रात्रि खराब हो सकती है। हमेशा हमें विचारों से हल्का बनना चाहिए यही आनंदमय जीवन का सूत्र है। जिस प्रकार एक डॉक्टर सलाह देता है कि वजन से हल्के बनो ताकि आपका स्वास्थ्य स्वस्थ रहे इसी तरह मन से विचारों से हल्के बनने पर हमें मानसिक एवं शारीरिक सभी बीमारियों से निजात मिल सकती है। जीवन में हमेशा अहंकार का त्याग करना चाहिए।अहंकार हमेशा ही हमें अवनति के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने कहा – हमें हमेशा अहिंसा के मार्ग पर चलना चाहिए। हमेशा अनावश्यक हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए। किसी भी कार्य को करते समय उसके प्रति मन के भावों को हमेशा ही सहज रखना चाहिए। मन के भावों की तीव्रता हमारी गति को बिगाड़ भी सकती है। बकरीद के अवसर पर हजारों मूक प्राणियों की हिंसा एवं उनकी आत्म शांति हेतु मुनि श्री ने सभी को सामूहिक रूप में सामायिक के साथ सांयकालीन सात से आठ, नमस्कार महामंत्र के जप की प्रेरणा भी दी। मुकेश राखेचा ने बताया – तेरापंथ युवक परिषद द्वारा बकरीद पर होने वाले हजारों मूक प्राणियों के आत्म शांति के लिए रात्रिकालीन सामूहिक सामायिक एवं नवकार महामंत्र आराधना आयोजित हुई। गुलाबबाग के नवनिर्वाचित सभा अध्यक्ष मनोज पुगलिया का स्वागत एवं अभिनंदन स्थानीय सभा के अध्यक्ष महेंद्र बैंद मंत्री मनोज भंसाली एवं निर्मल मरोठी के द्वारा जैन प्रतीक चिन्ह पहनाकर किया गया। मनोज पुगलिया अपनी टीम के सदस्यों के साथ गुलाबबाग से सभा के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित होने के बाद पहली बार मुनि श्री प्रशांत कुमार जी व मुनि श्री कुमुद कुमार जी के दर्शनाथ हेतु फारबिसगंज आए।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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