प्रथम बार जैन विधि से सामूहिक जन्मोत्सव

हमें अहिंसक विधि को अपनाना चाहिए -मुनि प्रशांत

कटिहार (बर्धमान जैन): आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद् कटिहार द्वारा प्रथम बार जैन संस्कार विधि से सामूहिक आठ सदस्यों का जन्मोत्सव मनाया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – गुरुदेव श्री तुलसी द्वारा प्रारंभ की गई जैन संस्कार विधि वर्षों से प्रचलित है।सभी कार्य जैन संस्कार विधि से होते है। जन्म से लेकर जीवन भर के सभी कार्य को हम सम्यक तरीके से करें। वर्तमान में जैन संस्कार विधि का प्रयोग बहुत प्रचलित है, जागरुकता भी बढ़ी है। अभातेयुप व्यवस्थित रूप से इस कार्य को कर रही है। संस्कारक को पूरी ट्रेनिंग दी जाती है। हम हमारी परंपरा के अनुरूप कार्य करें। जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है। हमें अहिंसक विधि को अपनाना चाहिए।सबके प्रति मंगलकामना,सबका आध्यात्मिक विकास हो।

हनुमान नाहटा ने बताया – कटिहार तेयुप के सदस्यों द्वारा विजय गीत का संगान किया गया। कार्यक्रम के संयोजक निशांत संचेती ने व्यक्तव्य प्रस्तुत किया। संस्कारक विरेंद्र संचेती ने जैन संस्कार विधि द्वारा सामूहिक जन्मोत्सव को विधिवत रूप से पूर्ण किया। आभार शुभम् भंसाली ने व्यक्त किया। प्रायोजक हनुमानमल शांति देवी नाहटा ने उपहार से सम्मानित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन राहुल सुराणा ने किया।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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