Pulwama attack : 23 साल की युवती ने की थी आतंकियों की मदद

नई दिल्ली: पुलवामा जांच में गिरफ्तार अकेली महिला इंशा जान इस हमले के मास्टरमाइंड फारूक की करीबी थी. उसने पिछले साल आत्मघाती हमले को अंजाम देने वाले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों की हर लिहाज़ से मदद की थी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में इस बात का खुलासा हुआ है. एनआईए का दावा है कि 23 साल की इंशा जान मार्च में सुरक्षा बलों द्वारा कश्मीर में मारे गए पाकिस्तानी बम बनाने वाले मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद उमर फारूक की साथी थी. वह उसके साथ फोन और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संपर्क में थी.

इस मामले में NIA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 13500 पन्नों की चार्जशीट दायर की है. इसके एक दिन बाद उन्होंने एनडीटीवी को बताया “हमने उनके बीच आदान-प्रदान किए गए कई संदेशों को पुनः प्राप्त किया है, जो उनकी निकटता का संकेत देते हैं और हमने अपनी चार्जशीट में इसका उल्लेख किया है.”

NIA के अनुसार इंशा जान के पिता तारिक पीर को भी फारूक से उसके रिश्ते के बारे में पता था. तारिक पीर ने कथित तौर पर पुलवामा और उसके आसपास उमर फारूक और उसके दो अन्य सहयोगियों को मूवमेंट की सुविधा दी थी. अधिकारी ने खुलासा किया कि आतंकवादी उसके घर पर एक समय में दो से चार दिन, 2018 और 2019 के बीच कई बार रुके थे. पिता-पुत्री की जोड़ी ने उमर फारूक, समीर डार और आदिल अहमद डार (हमले के तीन प्रमुख साजिशकर्ता) को 15 से अधिक अवसरों पर भोजन, आश्रय और अन्य रसद प्रदान की.

पिछले साल 14 फरवरी को पुलवामा में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी कार को एक सुरक्षा काफिले में घुसाकर 40 से अधिक सैनिकों को मार डाला था. एनआईए का कहना है कि आदिल अहमद डार आत्मघाती हमलावर था.

एनआईए की चार्जशीट में कहा गया है कि भारत में 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के भतीजे उमर फारूक को सुरक्षा बलों के मूवमेंट के बारे में इंशा जान जानकारी देती थी. मसूद अजहर को पुलवामा आतंक के प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में नामित किया गया है. एनआईए के आरोप पत्र में कहा गया है कि उमर फारूक ने 14 अप्रैल 2018 को चार अन्य आतंकवादियों के साथ भारत में घुसपैठ की. एनआईए ने कहा, ”हम झज्जर कोटली मामले की भी जांच कर रहे हैं जिसमें कुछ और आतंकवादी पार हो गए. हमने दो आतंकी गुर्गों को गिरफ्तार किया जिन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कितने आतंकवादियों को भारत पार जाने में मदद की थी. इसके बाद की जांच से पता चला कि इस जोड़ी ने उमर फारूक और चार अन्य को भारत में घुसपैठ करने में मदद की थी.”

उमर फारूक दक्षिण कश्मीर तक पहुंचने में कामयाब रहा और उसने अधिक आतंकवादियों को सक्रिय किया. अधिकारी ने कहा, “उसके वास्तविक भाई इब्राहिम हैदर के अक्टूबर 2018 में मुठभेड़ में मारे जाने के बाद ही पाकिस्तान से उसे कुछ बड़ा करने के लिए निर्देश प्राप्त हुआ था.”

उमर फारूक इंशा जान के घर जाता रहा. एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि जैश द्वारा जारी किए गए वीडियो में हमले की जिम्मेदारी ली गई थी. अधिकारी ने कहा कि “वीडियो में समीर डार की आवाज है और फिदायीन (आत्मघाती हमलावर) आदिल डार को दिखाया गया है. यह दो दिनों में शूट किया गया था. इसमें समीर का वॉयसओवर ठीक हो गया था लेकिन आदिल को पूरा भरोसा नहीं था, इसलिए उनका लिप सिंक मेल नहीं खा रहा था. बहुत सारे रीटेक के बाद वे वीडियो को ठीक से शूट करने में कामयाब रहे. इसके बाद उसको पाकिस्तान को व्हाट्सऐप कर दिया गया, जहां उसमें सुधार किया गया और फिर वापस भेज दिया गया. हमले के बाद यह वीडियो जारी किया गया था.”

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