Arshad Sharif News: पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या मामले में बड़ा खुलासा, मां ने बताया कौन जिम्मेदार और किसने रची साजिश – pakistani journalist arshad sharif mother writes to chief justice demanding fir against general qamar javed bajwa

इस्लामाबाद: केन्या में मारे गए पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की मां रिफत अल्वी ने पाक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने चिट्ठी में उन्होंने दावा किया कि अरशद शरीफ की केन्या में सुनियोजित और सोची समझी हत्या हुई थी। इसके लिए उन्होंने पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेट जनरल नदीम अंजुम समेत कई दूसरे सैन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की है। तीन पेज की चिट्ठी में रिफत अल्वी ने दावा किया है कि उनका बेटा राजनीति में पाकिस्तानी सेना का दखल, नागरिक मामलों में हस्तक्षेप और लोगों के गायब होने की कई स्टोरी पर काम कर रहा था। इस कारण सेना के कई बड़े अधिकारी उसके दुश्मन बन गए थे।

मेरा बेटा सेना की पोल खोल रहा था
रिफत अल्वी ने कहा कि अप्रैल 2022 में इमरान खान के खिलाफ नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव के बाद मेरे बेटे अरशद शरीफ ने सैद्धांतिक रुख अपनाया था। उनने राजनीति में सेना की भागीदारी और राजनीति में सेना की भूमिका की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि अरशद के पिछले 15 वर्षों से पाकिस्तान की सेना के साथ बहुत अच्छे संबंध थे। उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ किए गए लगभग सभी ऑपरेशनों को कवर किया था। लेकिन, जैसे ही उसने सेना की राजनीति और नागरिक मामलों में भागीदारी और लोगों के गायब होने की खोजी स्टोरी करनी शुरू की, सेना के अधिकारी उनके खिलाफ हो गए। वह सेना में इन अवैध कृत्यों को करने वाले व्यक्तियों की बहुत आलोचना करने लगे और उन्हें अपने ट्वीट्स और कार्यक्रमों में बताना भी शुरू कर दिया।

बाजवा और आईएसआई चीफ से सवाल पूछने पर मिली धमकी
अरशद की मां ने चिट्ठी में कहा कि उनके बेटे ने सबूत इकट्ठा किए और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और डीजी आईएसआई लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम से सवाल पूछने शुरू कर दिए। उन्होंने एआरवाई चैनल पर 31 मई 2022 को ‘वो कौन था’ नाम से कार्यक्रम भी किया था। इसके बाद से ही उन्हें कई धमकियां मिलनी शुरू हो गईं। सबसे पहले आईएसपीआर के ब्रिगेडियर मुहम्मद शफीक मलिक ने धमकी दी थी। इसके बाद अरशद ने अपने कई ट्वीट में ब्रिगेडियर मुहम्मद शफीक मलिक को ‘गंजा शैतान’ के नाम से संबोधित किया। इसके बाद उन्हें मेजर जनरल फैसल नसीर डीजी (सी) आईएसआई का संदेश देने के लिए इस्लामाबाद के आईएसआई सेक्टर मुख्यालय बुलाया गया। यहां आईएसआई के ब्रिगेडियर फहीम रजा ने उन्हें धमकाया था।

आईएसआई के अधिकारियों ने घर आकर धमकाया
उन्होंने बताया कि जब अरशद इसके बाद भी नहीं रुके और टीवी कार्यक्रमों में अपनी राय देते रहे तो ब्रिगेडियर फहीम रजा ने आईएसआई के कर्नल रिजवान और कर्नल नौमान के माध्यम से धमकियां भेजना शुरू कर दिया। अपनी आखिरी मुलाकात में ISI के कर्नल नोमान घर पर उससे मिलने आए और अरशद से कहा कि वह जो कह रहे हैं, वह संदेश सीधा शीर्ष अधिकारियों से आया है और इसका जवाब भी सीधा उनके पास ही पहुंचा दिया जाएगा। उन्होंने धमकी दी कि अगर अरशद अपने बयानों और राय को नहीं बदलते हैं तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हालांकि, अरशद ने अपना रुख नहीं छोड़ा और खोजी कार्यक्रमों को सामान्य तरीके से जारी रखा। इसके बाद पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में उनके खिलाफ कई प्रतिशोधात्मक एफआईआर दर्ज की गईं, जिसमें देशद्रोह के आरोप लगाए गए।

हत्या की साजिश के बाद पाकिस्तान छोड़ दुबई भागे
इसके बाद अरशद ने अपनी जान का खतरा बताते हुए न्याय के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और चीफ जस्टिस समेत कई लोगों को चिट्ठी लिखी। इसके बाद 9 अगस्त 2022 को अरशद के खिलाफ एक और एफआईआर लिखी गई। अंत में, 9 अगस्त 2022 को अरशद के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें पाकिस्तान में उनकी हत्या करने की योजना की रिपोर्ट भी मिलनी शुरू हो गई। पाकिस्तान ने अपने कई विश्वसनीय स्रोतों के माध्यम से हमें बताया कि कुछ हत्यारे उनका पीछा कर रहे थे और घर के पास भी आ गए थे, उन्हें सुरक्षा के लिए पाकिस्तान छोड़ना होगा। वह 10 अगस्त 2022 को पेशावर के रास्ते दुबई के लिए पाकिस्तान से रवाना हुए। अरशद पाकिस्तान में अपने पिछले एक महीने के दौरान बहुत सावधानी से घूम रहे थे, और यहां तक कि कभी-कभी कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलते थे।

बताया था- मौत के लिए कौन जिम्मेदार होगा
इसके बाद एआरवाई चैनल को ऑफ एयर कर दिया गया। 31 अगस्त को अरशद शरीफ को नौकरी से निकालने का ऐलान करने के बाद एआरवाई से प्रतिबंध हटाया गया। 10 अगस्त 2022 को दुबई रवाना होने से पहले अरशद ने ये सारी बातें मुझसे और परिवार से कई मौकों पर शेयर कीं और हमसे कहा कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो जनरल कमर जावेद बाजवा, लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम, मेजर जनरल फैसल नसीर, ब्रिगेडियर मुहम्मद शफीक मलिक, ब्रिगेडियर फहीम रजा, कर्नल रिजवान और कर्नल नौमान जिम्मेदार होंगे।

पाकिस्तान सरकार के दबाव में दुबई से निकाला गया
दुबई पहुंचने पर, अरशद कुछ दिनों के लिए एक होटल में रुके थे जब एक दिन यूएई का एक अधिकारी उनके पास आया और उनसे कहा कि उन्हें 48 घंटे के भीतर यूएई छोड़ना होगा क्योंकि उन पर अरशद को पाकिस्तान वापस भेजने का दबाव था। उसने बताया कि वे संयुक्त अरब अमीरात को छोड़कर किसी अन्य देश में जा सकते हैं। उन्होंने अरशद से कहा कि वे जानते हैं कि वह एक पत्रकार हैं इसलिए वे उनकी स्थिति को समझते हैं, इसलिए वे उन्हें निर्वासित करने के बजाय यूएई छोड़ने का अवसर दे रहे हैं।

केन्या में ली शरण, यूट्यूब पर जारी रखा प्रोग्राम
अरशद के पास किसी और देश का वीजा नहीं था। ऐसे में वह अगली सुबह दुबई से केन्या के लिए निकल गए। यहां वह वकार अहमद के साथ रहे, जिसकी व्यवस्था एआरवाई के सीईओ सलमान इकबाल ने तारिक वासी के माध्यम से की थी। केन्या में, अरशद लगभग 2 महीने तक रहे और राय देना जारी रखा। अपने Youtube चैनल Arshad Shant Official पर विभिन्न व्लॉग्स के माध्यम से राजनीति में सैन्य भागीदारी के बारे में सवाल उठा रहे थे।

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23 अक्टूबर की रात गोली मारकर की गई हत्या
23 अक्टूबर 2022 की देर रात, अरशद शरीफ की लक्ष्य बनाकर हत्या हुई। 24 अक्टूबर 2022 (पाकिस्तान समय) को लगभग 2 बजे मुझे खबर मिली कि अरशद को केन्याई पुलिस ने शूटआउट में मार दिया है, जब वह वकार अहमद के भाई खुर्रम अहमद के साथ यात्रा कर रहा था। केन्याई पुलिस ने शुरू में इसे गलत पहचान का मामला बताया, लेकिन जैसे-जैसे आने वाले दिनों में चीजें सामने आईं, यह स्पष्ट हो गया कि यह गलत पहचान के मामले के बजाय एक सुनियोजित लक्षित हत्या थी।

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जनरल बाजवा के खिलाफ दर्ज हो एफआईआर
इसलिए, मैं जनरल (आर) कमर जावेद बाजवा, लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम, मेजर जनरल फैसल नसीर, ब्रिगेडियर मुहम्मद शफीक मलिक, ब्रिगेडियर फहीम रजा, कर्नल रिजवान काल नौमान, वकार अहमद, खुर्रम अहमद और अन्य को एफआईआर में शामिल करना चाहती हूं। अरशद शरीफ की हत्या के कारण पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरे पत्रकार समुदाय में खौफ फैल गया। चूंकि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय तत्व शामिल हैं, इसलिए यह अनुरोध किया जाता है कि धारा 302 पीपीसी और आतंकवाद विरोधी अधिनियम 1997 की धारा 7 के तहत एफआईए के काउंटर टेररिज्म विंग में एफआईआर दर्ज की जाए।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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