पाकिस्‍तान में शांति क्‍या किसी बड़े तूफान की है आहट, भारत और दुनिया हाई अलर्ट पर

इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जनरल आसिम मुनीर को देश का नया सेना प्रमुख नियुक्‍त करके देश के एक तबके को बड़ी राहत दी है। राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी ने इस नियुक्ति को अपनी मंजूरी देकर पिछले कई महीनों से जारी अस्थिरता और उठा-पटक पर भी लगाम लगा दी। पूर्व पीएम इमरान खान के करीबी आरिफ अल्‍वी इस मामले में पेंच फंसा सकते थे लेकिन उन्‍होंने ऐसा कुछ नहीं किया। देश की सरकार ने भी राहत की सांस ली क्‍योंकि अल्वी कुछ गड़बड़ करते तो फिर देश एक बड़े संवैधानिक संकट की तरफ बढ़ सकता था। इस बात पर बहस जारी है और आगे भी जारी रहेगा कि क्‍या सेना देश में राजनीतिक संकट के लिए जिम्‍मेदार है। इमरान खान ने भी संकट की आग में घी डालने का काम किया।


पाकिस्‍तान में सेना और राजनीति को अलग करना नामुमकिन है। दोनों ही एक दूसरे में अक्‍सर हस्‍तक्षेप करने के आदी रहे हैं। पूर्व सेना प्रमुख रिटायर्ड जनरल कमर बाजवा ने सेना से अपील की है कि वह राजनीति से दूर रहे। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले दिन पाकिस्‍तान में उठापटक वाले हो सकते हैं। पाकिस्‍तान में भारत के उच्‍चायुक्‍त रहे टीसीए राघवन ने लिखा है कि बाजवा जो खुद सेना को राजनीति से दूर रहने की सलाह देकर गए हैं असल में खुद इसका हिस्‍सा रहे हैं। पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने उन्‍हें हमेशा अपनी सत्‍ता जाने का दोषी ठहराया है।

कुछ लोग यह मानते हैं कि जिस तरह से नवाज सत्‍ता से बेदखल हुए उसी तरह से इस साल अप्रैल में इमरान की कुर्सी गई थी। आज देश की राजनीति में ऐसे लोग शामिल हैं जिन्‍होंने कभी न कभी सेना पर कोई न कोई आरोप जरूर लगाया है। ऐसे में यह कहना बहुत मुश्किल है कि सरकार और बाकी राजनीतिक दल सेना पर भरोसा करते हैं या फिर इसे एक सुरक्षित विकल्‍प के तौर पर देखते हैं। नए सेना प्रमुख किस तरह से सबकुछ ठीक करेंग यह चर्चा का विषय है और आने वाले दिनों में ही इस पर से पर्दा उठेगा। वर्तमान समय में सबकुछ ठीक है। इमरान खान ने भी प्रदर्शन खत्‍म और मार्च को रोकने की बात कह दी। लेकिन जब उन्‍होंने पंजाब प्रांत और खैबर पख्‍तूनख्‍वां में पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की सभी सीटों को छोड़ने का ऐलान किया तो एक नया मसला शुरू हो गया।

विशेषज्ञों की मानें तो अगले कुछ दिनों में नवाज शरीफ पाकिस्‍तान लौटने वाले हैं। वह फिर से अपना राजनीतिक भविष्‍य तलाशने की कोशिश करेंगे। ऐसे में न्‍यायपालिक और सेना दोनों के लिए यह एक कठिन सवाल होगा कि नवाज को राजनीति से बैन करने का फैसला सही था या नहीं। जो बात स्‍पष्‍ट है उसके मुताबिक जो भी राहत अभी पाकिस्‍तान के लिहाज से महसूस की जा रही है, वह अस्थाई साबित होगी। वर्तमान में सिर्फ राजनीतिक संघर्ष पर ही विराम लगा है। इस संघर्ष को स्‍थायी तौर पर सिर्फ चुनाव के जरिए ही खत्‍म किया जा सकता है।
अगर देश में चुनाव हुए तो फिर स्थिति बहुत ही दुखी करने वाली और खतरनाक हो सकती है। संकट में घिरी अर्थव्‍यवस्‍था टूटने की कगार पर आ जाएगी, अफगानिस्‍तान में मौजूद आतंकी संगठन और घरेलू आतंकवाद और बढ़ेगा। भारत जो अभी तक राहत की सांस ले रहा है, वह हाई अलर्ट पर है। एक अस्थिर पाकिस्‍तान खतरे की घंटी है। यह पहली बार नहीं है जब पड़ोसी मुल्‍‍क में स्थिति इतनी शांत है। इसलिए भारत और दूसरे देश हाई अलर्ट पर हैं और देश में होने वाली हर घटना पर करीब से नजर रखी जा रही है।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

𝘌𝘥𝘪𝘵𝘰𝘳, 𝘠𝘢𝘥𝘶 𝘕𝘦𝘸𝘴 𝘕𝘢𝘵𝘪𝘰𝘯 ✉yadunewsnation@gmail.com

http://yadunewsnation.in
error: Content is protected !!