चीन अमेरिकी वायु सेना का मुकाबला करने के लिए अपनी छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर लगातार प्रगति कर रहा है

बीजिंग: चीन और अमेरिका में आसमान पर बादशाहत को लेकर खींचतान जारी है। अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों को जवाब देने के लिए चीन छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बना रहा है। वर्तमान में प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमेरिका ने एफ-22 के अलावा एफ-35 लड़ाकू विमानों को तैनात किया हुआ है। इसके अलावा चीन के कट्टर दुश्मन जापान और दक्षिण कोरिया भी एफ-35 विमान को ऑपरेट कर रहे हैं। चीनी वायु सेना में पहले से ही पांचवी पीढ़ी का चेंगदू जे-20 लड़ाकू विमान शामिल हैं, हालांकि ताकत और क्षमता के बारे में यह अमेरिकी लड़ाकू विमानों से काफी पीछे है। कई एविएशन एक्सपर्ट्स चीन के जे-20 के स्टील्थ होने पर शक जता चुके हैं। ऐसे में चीन अब छठवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाकर अपनी हवाई क्षमता को अमेरिका के बराबर करने ताक में है।

छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर कोई सार्वभौमिक रूप से सहमत परिभाषा नहीं है। फिर भी छठी पीढ़ी के विमान की मॉड्यूलर डिजाइन, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल और आरगुमेटेड रियलिटी, ड्रोन स्वार्म और दूसरी अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस होने की संभावना है। एयर एंड स्पेस फोर्सेज मैगज़ीन के सितंबर एडिशन में प्रकाशित एक लेख में जिक्र किया गया है कि चीन अपने 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। यह अमेरिका के क्लासिफाइड यूएस नेक्स्ट जेनरेशन एयर डोमिनेंस (एनजीएडी) प्रोग्राम की प्रतिक्रिया के रूप में है।

इस सितंबर अमेरिकी वायु सेना के एयर, स्पेस एंड साइबर कांफ्रेंस में एयर कॉम्बैट कमांड (एसीसी) के प्रमुख जनरल मार्क केली ने कहा कि चीन छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को विकसित करने पर तेजी से काम कर रहा है। इसका मकसद चीन के हवाई प्रभुत्व को स्थापित करना है। नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को दुश्मन की पकड़ में आने के बचाने के लिए उसके रडार क्रास सिग्नेचर को कम किया जाएगा। इसके अलावा, अधिक हथियारों के साथ युद्ध के मैदान में प्रभावी भूमिका निभाने वाला बनाया जाएगा। चीन भविष्य में होने वाले युद्ध को ध्यान में रख नई पीढ़ी के लड़ाकू विमान को विकसित कर रहा है।

केली ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास को लेकर अमेरिका को बहुत कम बढ़त हासिल होने का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने प्रतिद्वंदियों से ठीक एक महीने पहले छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान मिलने की उम्मीद है। उन्होंने प्रतिद्वंदियों के तौर पर किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका आशय चीन और रूस से था। ये दोनों देश छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बनाने के लिए पहले से ही काम कर रहे हैं। अमेरिकी कमांडर ने चीन की बढ़त की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि चीन ने काफी कम समय में खुद को एविएशन सेक्टर में एक दिग्गज के रूप में स्थापित किया है। यह चीन की बढ़ती ताकत को दिखाता है।

चीन के जे-20 लड़ाकू विमान को माइटी ड्रैगन के नाम से जाना जाता है। यह लड़ाकू विमान आवाज से दोगुनी तेज रफ्तार से उड़ान भर सकता है। इसे चीन की चेंगदू एयरोस्पेस कॉर्पोरेशन ने बनाया है। चीन दावा करता है कि यह लड़ाकू विमान स्टील्थ तकनीकी से लैस है, जिसे कोई भी रडार नहीं पकड़ सकता है। J-20 की बेसिक रेंज 1,200 किलोमीटर है जिसे 2,700 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। J-20 की लंबाई 20.3 मीटर से 20.5 मीटर के बीच होती है। इसकी ऊंचाई 4.45 मीटर और विंगस्‍पैन 12.88-13.50 मीटर के बीच है। जे-20 का खाली वजन 19391 किलोग्राम है, जबकि यह 37013 किलोग्राम के कुल वजन के साथ उड़ान भरने में सक्षम है, जिसमें फ्यूल और हथियार भी शामिल हैं।

अमेरिका में बने एफ-35 लड़ाकू विमान वर्टिकल-टेक ऑफ और लैंडिंग तकनीकी से लैस हैं। एफ-35 के पहले प्रोटोटाइप ने 15 दिसंबर 2006 को पहली बार उड़ान भरी थी। लॉकहीड मार्टिन ने अबतक एफ-35 की 770 यूनिट का निर्माण किया है। एक एफ-35 लड़ाकू विमान की कीमत 122 मिलियन डॉलर है। इस विमान के तीन वेरिएंट्स को बनाया गया है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना, वायु सेना के अलावा मरीन कॉप्स करती है। अमेरिका ने एफ-35 लड़ाकू विमान को दुनिया के कई देशों को बेचा है। इनमें यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, इटली, कनाडा, नीदरलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क, तुर्की, इजरायल और जापान या तो इसे ऑपरेट कर रहे हैं या फिर खरीदने की प्रक्रिया में हैं।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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