US developing New Nuclear Submarine For China Russia War

वॉशिंगटन: अमेरिका साल 2030 तक दुनिया के सामने एक ऐसी पनडुब्‍बी को लेकर आने वाला है जो उसकी सेनाओं की ताकत में कई गुना तक इजाफा कर देगी। अमेरिकी सेनाएं इस समय SSN (X) अगली पीढ़ी की उस पनडुब्‍बी को डेवलप करने में लगी है जो परमाणु हमला करने में सक्षम होगी। अमेरिका ने पहले वर्जिनिया क्‍लास की पनडुब्‍बी को सेना के लिए खरीदने का मन बनाया था। लेकिन अब उसने अपना फैसला बदला है।

एक रिपोर्ट की मानें तो यह प्रोग्राम अमेरिकी सेनाओं की उस चिंता को दूर करेगा जो पनडुब्‍बी बेड़े के रख-रखाव से जुड़ा है। साथ ही चीन और रूस की तरफ से समुद्र के अंदर मिलने वाली चुनौतियों का सामना भी करने में उसे समर्थ बनाएगा। अमेरिकी कांग्रेस की अगस्‍त में आई रिपोर्ट की मानें तो अभी इस पनडुब्‍बी का सटीक डिजाइन तय नहीं हो पाया है।

अमेरिका का भारत को ऑफर, डिफेंस एक्‍सपो में दिखेगी झलकवर्जिनिया क्‍लास पनडुब्‍बी को वृद्धिशील बदलाव के तहत तैयार किया जा रहा है जिन्‍हें ब्‍लॉक्‍स के तौर पर जाना जाता है। यह वह नया डिजाइन है जो मेनटेनेंस की सारी समस्‍याओं को दूर करता है। साथ ही इसमें ऐसी टेक्‍नोलॉजी हैं जिन्‍हें गेम चेंजर करार दिया जा रहा है। यह नई तकनीकी एक नई क्‍लास की पनडुब्‍बी को डेवलप करने में मददगार होगी।

अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी नौसेना ने अनुमान लगाया है कि SSN (X) की एक पनडुब्‍बी पर करीब 5.8 अरब डॉलर लागत आएगी। यह कीमत वर्जिनिया क्‍लास पनडुब्‍बी की लागत से 3.6 अरब डॉलर ज्‍यादा है। नेवल इंजीनियर्स एनुअल फ्लीट मेनटेनेंस एंड मॉर्डनाइजेशन सिम्‍पोसियम में रीयर एडमिरल जोनाथन रकर ने कहा था कि अमेरिका के पास अभी 50 SSN क्‍लास की पनडुब्‍बी हैं लेकिन 18 पनडुब्बियां मेनटेंनस से गुजर रही हैं। ऐसे में उन्‍हें ऑपरेट नहीं किया जा सकता है। रकर ने कहा कि वर्तमान समय में इन पनडुब्बियों का मेनटेनेंस काफी महंगा है और एक पनडुब्‍बी के रखरखाव में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

दिसंबर 2021 में अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने डिफेंस प्रोडक्‍शन एक्‍ट के तहत तीन फैसलों को साइन किया था। इन फैसलों के बाद अमेरिकी पनडुब्बियों का इंडस्‍ट्रीयल बेस मजबूत होने की उम्‍मीद है जाकि वर्जिनिया क्‍लास की पनडुब्बियो का उत्‍पादन बढ़ाया जा सके। अमेरिका ने साल 2000 में वर्जिनिया क्‍लास की पनडुब्बियों का निर्माण शुरू किया था। उस समय मकसद एक ऐसे विकल्‍प की तलाश करना था जो सीवोल्‍फ क्‍लास से कम महंगा हो।

इन पनडुब्बियों का निर्माण 1989 और 2005 में किया गया था और इन्‍हें काफी महंगा करार दिया गया था। चीन और रूस लगातार अपनी पनडुब्बियों की संख्‍या में इजाफा करने में लगे हैं। ऐसे में अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी सेनाओं को इस तरफ ध्‍यान देने के लिए कहा है।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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