आचार्य भिक्षु ने की आचार- विचार क्रांति – मुनि ज्ञानेंद्र
इस्लामपुर (बर्धमान जैन): आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य डॉ मुनिश्री ज्ञानेंद्र कुमार जी,मुनिश्री प्रशांत कुमारजी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा निर्देशित भिक्षु दर्शन प्रशिक्षण कार्यशाला इस्लामपुर तेरापंथ युवक परिषद द्वारा आयोजित हुई। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ज्ञानेंद्र कुमार जी ने कहा – हम आचार्य श्री भिक्षु के नाम को मानते हैं लेकिन कार्य को नहीं जानते। उनके सिद्धांतों को समझना बहुत आवश्यक है क्योंकि जब तक दृष्टिकोण सही नहीं होगा तब तक क्रिया कैसे सही होगी ? आपका दृष्टिकोण क्या है ?, आप मानते क्या हो। इसलिए आचार्य भिक्षु को जानना, समझना बहुत जरूरी है। आचार्य श्री भिक्षु ने आचार क्रांति की, विचार क्रांति की। सही तत्व को गलत तरीके से पढ़ा जाता है उसकी क्रांति की। जनमानस गलत अवधारणा में जी रहा था आचार्य श्री भिक्षु ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को ही सम्यक रूप से प्रस्तुत किया। लौकिक लोकोत्तर की भेद रेखा को व्यक्त किया। आत्म धर्म एवं संसार के कर्तव्य में बहुत अंतर होता है।उन्होंने पांच मौलिक मर्यादाओं के माध्यम से धर्म-अधर्म, त्याग-भोग, व्रत- अव्रत, सांसारिक एवं मोक्ष मार्ग का स्पष्ट, यथार्थ एवं मौलिक चिंतन प्रस्तुत किया। जिसने भिक्षु विचार दर्शन को गहराई से पढ़कर चिंतन मनन कर लिया उसने भगवान महावीर के सिद्धांतों को समझ लिया।

मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – सम्यकत्व को कायम रखने के लिए दृष्टिकोण सही होना जरूरी है। आचार्य श्री भिक्षु ने आगम वाणी के आधार पर विचार दर्शन, सिद्धांत प्रस्तुत किए। उनके विचार अध्यात्मवादी थे।मोक्ष मार्ग जन्म मरण को घटाने वाला एवं संसार का मार्ग मोक्ष को दूर करता है। आचार्य भिक्षु ने मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया। लौकिक लोकोत्तर के मिश्रण से व्यक्ति अज्ञानता में भटक कर मिथ्यात्व में जी रहा था। उन्होंने लौकिक लोकोत्तर की भेद रेखा का स्पष्ट चिंतन दिया।दान-दया का यथार्थ रूप बताते हुए कहा कि पाप के आचरण से अपनी आत्मा को बचाना दया है। लौकिक दान संसार का कर्तव्य है लोकोत्तर दान मुक्ति का मार्ग है।धर्म का सम्बन्ध आत्मा के साथ है।साधन शुद्धि पर उन्होंने बहुत बल दिया।
अभिनंदन सिंघी ने बताया – तेरापंथ युवक परिषद के विजय गीत से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद कोषाध्यक्ष विकास बोथरा ने विचारों की अभिव्यक्ति दी। आभार सहमंत्री कुलदीप गोलछा ने प्रस्तुत किया। मुनिश्री ज्ञानेंद्र कुमार जी ने श्रावक समाज की जिज्ञासाओं का समाधान प्रस्तुत किया।कार्यशाला का संचालन मंत्री मुदित पींचा ने किया।

