बीजिंग: चीन का अफ्रीकी देश जिबूती में बना सैन्य अड्डा भारत के लिए चिंता की बात हो सकती है। चीन यहां एयर क्राफ्ट कैरियर, बड़े युद्धपोत, पनडुब्बियों को तैनात कर सकता है। यह एक ऐसा कदम होगा जो भारतीय नौसेना की सुरक्षा पर गहरा असर डालेगा। अमेरिकी रक्षा विभाग की चीन पर वार्षिक रिपोर्ट में इस सैन्य बेस के बारे में कांग्रेस को बताया गया है। रविवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया, ‘मार्च 2022 के अंत में एक FUCHI II श्रेणी का आपूर्ति जहाज यहां पर रुका था, जो दिखाता है कि यह बेस अब चालू है।’
भारतीय नौसेना के पास रूस में बने दो एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत हैं। अमेरिका की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘PLA नेवी मरीन बख्तरबंद वाहनों और तोपखानों के साथ जिबूती बेस पर तैनात हैं। वर्तमान में पास के एक वाणिज्यिक बंदरगाह का इस्तेमाल किया जा रहा है।’ रिपोर्ट में कहा गया, ‘जिबूती बेस पर तैनात चीन की सेना ने ड्रोन और जहाजों को उड़ाकर अमेरिकी उड़ानों में हस्तक्षेप किया है। चीन ने जिबूती के संप्रभु हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित करने की मांग की है।’
दूसरे शब्दों में अमेरिका का मानना है कि क्षेत्र में तैनात चीन की सेना ने जमीन से लेजर के जरिए अमेरिकी विमानों के पायलटों की आंखों को लेजर से टार्गेट किया है। चीन ने 2016 में यह बेस बनाना शुरू किया था, जिसकी लागत 590 मिलियन डॉलर है। यह बेस बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य पर स्थित है, जो दुनिया में व्यापार का एक महत्वपूर्ण चेन है। यहां से चीन हिंद महासागर तक पहुंच बना सकता है। स्वेज नहर के रास्ते में ये बेस है, जिसे चीन ब्लॉक कर सकता है।

