इस्लामाबाद: पाकिस्तान और भारत के बीच दुश्मनी में कई वर्षों से बासमती चावल को भी देखा जा रहा है। पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को एक सीनेट पैनल को बताया कि यूरोपीय संघ ने भारतीय बासमती चावल को कोई विशेष एक्सेस नहीं दिया है। सीनेट कमेटी फॉर कॉमर्स की बैठक के दौरान सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्रालय के सचिव ने एक ख्याली जवाब भी दिया। सचिव ने कहा कि वर्तमान में पाकिस्तान भारत की तुलना में यूरोपीय बाजारों को अधिक बासमती चावल निर्यात कर रहा है।
बासमती चावल भारत और पाकिस्तान का साझा उत्पाद है। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बासमती चावल भारत में पैदा होता है। भारत ने इसके लिए GI टैग का आवेदन किया था, जो दोनों देशों के बीच विवाद का कारण बन गया है। अगर भारत को यह स्पेशल एक्सेस मिल जाता है तो पाकिस्तान को बड़ा नुकसान होगा। सचिव सुआलेह अहमद फारूकी ने दावा कि यूरोपीय संघ ने अभी तक अनुरोध पर कोई प्रगति नहीं की है। जबकि ऑस्ट्रेलिया की ओर से भारत का अनुरोध खारिज कर दिया गया है। वहीं उनका कहना है कि अमेरिका में इसकी कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
पाकिस्तान का दावा है कि वह यूरोप में भारत से भी ज्यादा बासमती चावल का निर्यात करता है। लेकिन गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ में लगभग दो तिहाई बासमती का आयात भारत और शेष पाकिस्तान से होता है। भारत और पाकिस्तान के अलावा बासमती चावल को यूरोप में थाईलैंड, अमेरिका और वियतनाम से भी आयात किया जाता है। हालांकि इनका मार्केट शेयर भारत और पाकिस्तान से बेहद छोटा है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि भारत को GI टैग मिले।
GI टैग किसी भी उत्पाद को देना उसकी प्रतिष्ठा को बढ़ा देता है। इस वजह से सामान की कीमत बढ़ती है। चाय के पैकेट पर ‘दार्जिलिंग टी’ लिखने का एक्सेस 2011 में मिला था, जिसके बाद यूरोप में इसकी कीमत बढ़ गई थी। बासमती की बात करें तो यह लंबे चावल अपनी खुशबू, स्वाद और आकार के लिए जाने जाते हैं। दुनिया भर में चावल से बनने वाले कई पकवानों में इसे प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय बासमती चावल खाड़ी देश, उत्तरी अमेरिका में भी निर्यात किया जाता है।

