नेपाल में हवाई सफर मतलब जान हथेली पर लेकर उड़ना, पायलटों के भी छूट जाते हैं पसीने, इतना खतरा क्यों?

काठमांडू : नेपाल में रविवार को एक दुखद हादसा हो गया। राजधानी काठमांडू से पोखरा जा रही एक फ्लाइट क्रैश हो गई। इसमें कुल 72 लोग सवार थे। पैसेंजर प्लेन के मलबे से अब तक 40 शव निकाले जा चुके हैं। सोशल मीडिया पर शेयर तमाम वीडियो में विमान की जो दिख रही है, उससे लग रहा है कि मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है। यह फ्लाइट येती एयरलाइंस की थी। येती एयरलाइंस और उसकी सहायक तारा एयर के विमान हादसों का पुराना और लंबा इतिहास है। यही कारण है कि AirlineRatings.com नामक वेबसाइट किसी भी एयरलाइन को रेट नहीं करती है।

वेबसाइट के अनुसार येती एयरलाइंस, तारा एयर की पैरेंट कंपनी है। 2004 के बाद से येती एयरलाइंस के चार घातक प्लेन क्रैश हो चुके हैं जिनमें आज की एटीआर 72 फ्लाइट भी शामिल है। वहीं तारा एयर में तीन घातक विमान हादसों के अलावा पांच ‘गैर-घातक’ घटनाएं भी शामिल हैं। दोनों एयरलाइंस पहाड़ी और बेहद जोखिम भरे हिमालय क्षेत्र में उड़ान भरती हैं। नेपाल को दुनिया की ‘सबसे जोखिम भरी हवाई यात्राओं’ वाले देशों में से एक माना जाता है। पिछले 10 साल में नेपाल में करीब 20 प्लेन क्रैश हो चुके हैं।मौत के मामले में रविवार का हादसा 11वां बड़ी दुर्घटना थी। तारा एयर हो या येती एयरलाइंस यह जानना जरूरी है कि आखिर क्यों नेपाल में हवाई जहाज से यात्रा करना इतना रिस्की है। नेपाल में बीते 10 साल के विमान हादसों पर नजर डालने पर ज्यादातर दुर्घटनाग्रस्त प्लेन तारा एयर और एक येती एयरलाइंस के मिलते हैं। अलग-अलग हादसों में क्रैश के अलग कारण बताए जाते हैं। कभी खराब मौसम, कभी कम दृश्यता और ऊपर से पहाड़ी इलाका नेपाल में हवाई सफर को जोखिमभरा बना देता है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका खराब मौसम की रहती है।

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट समेत 14 में से आठ सबसे ऊंचे पहाड़ नेपाल में स्थित हैं। दुनिया का सबसे खतरनाक एयरपोर्ट भी नेपाल में ही है। लुक्ला शहर में स्थित एयरपोर्ट को सबसे खतरनाक कहने के पीछे ठोस कारण है। पहाड़ों के बीच चट्टान को काटकर बनाए गए रनवे पर प्लेन लैंड करना बिल्कुल आसान नहीं है। रनवे के एक तरफ पहाड़ है तो दूसरी तरफ खाई इसलिए जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अच्छी तरह ट्रेंड और अनुभवी पायलटों को ही लुक्ला के रनवे पर प्लेन उतारने दिया जाता है। इसीलिए नेपाल में प्लेन उड़ाना बिल्कुल आसान नहीं है।

रविवार के हादसे के बाद नेपाल के नागरिक उड्डयन प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि इसके पीछे मौसम नहीं था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विमान हादसा तकनीकी कारणों के चलते हुआ है। अधिकारी ने कहा कि जानकारी मिली है कि विमान में तब ही आग की लपटें देखी गई थीं जब वह हवा में था। विमान पोखरा हवाईअड्डे पर उतरने से सिर्फ 10 सेकेंड पहले ही क्रैश हो गया। क्रैश के सटीक कारण फिलहाल सामने नहीं आए हैं।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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