राणा अय्यूब को अमेरिकी सीनेटर का समर्थन, भारत को जमकर बांटा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाला ‘ज्ञान’

वाशिंगटन: एक प्रमुख अमेरिकी सीनेटर ने भारतीय पत्रकार राणा अय्यूब के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि अय्यूब का काम उद्देश्यों पर आधारित है और यह भारत और उन आदर्शों के प्रति उनके प्रेम से प्रेरित है, जिसके लिए उनका देश आवाज उठाता है। गुरुवार को जारी बयान में डेमोक्रेटिक सीनेटर पैट्रिक लेही ने कहा कि राणा अय्यूब एक पुरस्कार विजेता भारतीय पत्रकार हैं, जिन्होंने भारत में धार्मिक हिंसा, न्यायेतर हत्याओं और सार्वजनिक हित से जुड़े अन्य मामलों पर बहादुरी के साथ रिपोर्टिंग की है।

उन्होंने कहा कि अय्यूब का काम उद्देश्यों पर आधारित है और यह भारत और उन आदर्शों के प्रति उनके प्यार से प्रेरित है, जिसके लिए उनका देश आवाज उठाता है। बावजूद इसके उन्हें ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग, हत्या की धमकी और बेबुनियाद सरकारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। वरमॉन्ट से सांसद लेही ने कहा कि अय्यूब की आवाज दबाने के सरकारी अधिकारियों के भारी दबाव के बावजूद उनके द्वारा सत्ता का दुरुपयोग करने वाले लोगों का पर्दाफाश करना जारी है।

‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लेही ने कहा कि वर्ष 2022 में महज अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए दुनियाभर में कम से कम 38 पत्रकारों की हत्या कर दी गई, 294 को जेल में कैद कर दिया गया और 64 अभी भी लापता हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पत्रकारों को धमकी, उत्पीड़न और कानूनी कार्यवाही का सामना भी करना पड़ा।

लेही ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र की आधारशिला है और इसकी अनुपस्थिति में एक लोकतांत्रिक सरकार और एक तानाशाही हुकूमत के बीच के मूलभूत अंतर गायब हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “सीनेट में मेरे 48 वर्षों के दौरान मुझे अक्सर याद दिलाया गया है कि प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना और भ्रष्टाचार, अन्याय, भेदभाव तथा दंड से मुक्ति पर प्रकाश डालने वाले पत्रकारों के काम को बढ़ावा देना हममें से प्रत्येक की जिम्मेदारी है।”

लेही ने कहा, “हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों के लिए खड़ा होना चाहिए, ताकि दुनिया भर में राणा अय्यूब और उनके बहादुर सहयोगी प्रतिशोध के डर के बिना अपना जरूरी काम कर सकें। ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ के अनुसार, अय्यूब एक भारतीय खोजी पत्रकार हैं जो ‘वाशिंगटन पोस्ट’ (अखबार) के लिये स्तंभ लिखती हैं। इसके अलावा ट्विटर पर उन्हें 15 लाख लोग पढ़ते हैं। इसके साथ ही वह सबस्टेक न्यूजलेटर भी सीधे ग्राहकों को भेजती हैं।

अक्टूबर 2022 में प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन रोधी कानून के तहत उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से जुटाए गए 2.69 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपने लिए किया और विदेशी योगदान कानून का भी उल्लंघन किया। अय्यूब ने कहा है कि उनके द्वारा कोविड-19 सहायता के लिए जुटाई गई धनराशि का उपयोग लोगों की “सख्त जरूरत” में उनकी मदद करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ किया गया था।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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