बाइडन और शहबाज शरीफ के बीच मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी भी मौजूद थे। पाकिस्तानी और अमेरिकी नेताओं के बीच मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि बाइडन के सत्ता में आने के बाद किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से पहली बार सीधी बातचीत हुई है। इससे पहले इमरान खान के प्रधानमंत्री रहने के दौरान पाकिस्तान ने पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन बाइडन ने उन्हें भाव नहीं दिया। इमरान खान चाहते थे कि बाइडन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी बात हो लेकिन पीटीआई नेता का सपना धरा का धरा रह गया था।
इमरान ने सरकार के गिरने के पीछे अमेरिकी साजिश बताया
इमरान खान ने स्वतंत्र विदेश नीति के नाम पर अमेरिकी विरोध के बाद भी यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस की यात्रा पर गए और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस बीच इमरान खान की सरकार सेना के समर्थन खींच लेने के बाद संसद में बहुमत खो देती है और शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बन गए। इमरान खान ने अपनी सरकार के गिरने के पीछे अमेरिकी साजिश बताया था। उन्होंने कहा कि रूस के साथ दोस्ती करने के कारण अमेरिका ने उनकी सरकार गिरवाई। इससे अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए।
पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार बनने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंध फिर से पटरी पा आ रहे हैं। बाइडन ने मुलाकात से पहले पाकिस्तान को एफ-16 फाइटर जेट के लिए पैकेज और बाढ़ पीड़ितों के लिए करोड़ों डॉलर की मदद पाकिस्तान को भेजी है। बाइडन ने अपने भाषण में भी पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र किया है और दुनिया से मदद देने का आह्वान किया है। कहा यह भी जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख अपने रिटायरमेंट से पहले अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं।
पाकिस्तान और अमेरिका के बीच फिर से दोस्ती में जवाहिरी कनेक्शन
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच फिर से दोस्ती में अल जवाहिरी के मौत की भी बड़ी भूमिका रही। माना जाता है कि पाकिस्तान के हवाई रास्ते अफगानिस्तान में घुसे अमेरिकी हमलावर ड्रोन ने काबुल में तालिबान की सुरक्षा में रह रहे अलकायदा सरगना अयमान अल जवाहिरी को मार गिराया। पाकिस्तान ने इसका खंडन किया था लेकिन तालिबान ने जनरल बाजवा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।

