बड़े बुजुर्ग होते है परिवार की छत -मुनि प्रशांत
गुलाब बाग (बर्धमान जैन): आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनिश्री प्रशांत कुमारजी, मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा निर्देशित बाग़बान कार्यक्रम गुलाब बाग महिला मंडल द्वारा आयोजित किया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – बगीचे में अनेक तरह के फल फूल के पौधे होते है। बगीचा हरा भरा रहता है तो सबको अच्छा लगता है। पक्षी भी वहां जाते है जहां हरापन हो। परिवार भी एक बगीचा है। परिवार रुपी बगीचा हरा भरा रहें तो आने वाले व्यक्ति को प्रसन्नता होती है, आनन्द मिलता है।मन सूखा होता है तो बाहरी साज- सज्जा जीवन को सुंदर नहीं बना सकता। एक दूसरे के प्रति प्रेम, समर्पण भाव, स्वार्थ का त्याग भावना होनी चाहिए। परिवार को सुखी रखने की भावना, परिवार को आगे बढ़ाने की भावना रहती है तो परिवार हरा भरा रहता है। जहां दिमाग में पैसा हावी हो जाता है वहां परिवार सुखी नही रह पाता है। बड़े बुजुर्ग के मन को शांति रहनी चाहिए। अपनी सुविधाओं को गौण करके अभिभावकों की सेवा करें। अपने अपने कर्तव्य का पालन करें। माता पिता के मन में अशांति रहती है तो घर में आनन्द नहीं रहता है। बड़ों का आशीर्वाद जीवन में बहुत बड़ा साहयक होता है। बड़े बुजुर्ग परिवार की छत होते है। बड़े भी छोटों को वात्सल्य एवं स्नेह देते रहें। अपने आप को कमजोर नहीं समझे। मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा – आचार्य श्री भिक्षु ने व्यवहारनय की दृष्टि से दिशा बोध देते हुए कहा कि सभी साधु साध्वी आपस में सौहार्द, मैत्री प्रेम भाव से रहें। एक से अनेक सदस्य एक साथ रहते है तो आपसी स्नेह,सहयोग भाव होना बहुत जरुरी है।हम परिवार के साथ रहना एवं जीना सीखें। सप्ताह में कम से कम एक बार सामूहिक भोजन,भजन,संवाद होता रहता है तो विचारों का आदान-प्रदान होता है। एक दूसरे के साथ समय व्यतीत होता है।मन में गांढ बंधने की स्थिति नहीं बनती है। बहुत सारी समस्याएं स्वतः ही दूर हो जाती है। अपेक्षा से भी बचना चाहिए। अपेक्षा की पूर्ती न होना और उपेक्षा होने से व्यक्ति अपने आप को दुखी बना लेता है। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ। श्रीमती लीला ललवाणी ने विचार व्यक्त किए। आभार महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती बबिता मालू ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती संतोष श्रीमाल ने किया।


