इस्लामपुर: युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जी मुनि श्री प्रशांत कुमार जी आदि ठाणा-४ के सान्निध्य में व्यक्तित्व विकास कार्यशाला “सोच की जंजीर,रिश्तों की दूरी “कार्यशाला आयोजित हुई।जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री डॉ ज्ञानेन्द्र कुमार जी ने कहा – दृष्टिकोण बदलने से जीवन की समस्या दूर हो जाती है।परिस्थिति व्यक्ति की मनःस्थिति को प्रभावित न करे।सीपीएस बोलने की कला ही नहीं जीवन जीने की कला भी सिखाती है ,जिससे चिंतन में परिवर्तन आता है।व्यक्ति के व्यवहार,कार्यशैली ,व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है।व्यक्ति के व्यक्तित्व से परिवार ,समाज भी प्रभावित होता है।जीवन में जितना तनाव कम होता है उतनी ही जिंदगी सुख शांति से व्यथित होती है।हम जीवन को जीना सीखे ।साथ में रहना सीखे। रिश्तों में मिठास के लिए एक दूसरे का सहयोग करे ,एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना सीखे।गुरु के सपनो को साकार करने के लिए कार्य करते रहे ।जीवन की सार्थकता तभी होगी जब हम अपने लिए ,परिवार के लिए एवं समाज के लिए कुछ करके जाएँगे।आज की यह कार्यशाला से प्रेरणा प्राप्त करे।श्रीमती प्रियंका ने काफ़ी विकास किया है।धर्मसंघ की संस्थाए एवं प्रतिभाए समाज उपयोगी बहुत कार्य कर रही है ।
मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा-कुछ वर्षों पूर्व तक संयुक्त परिवार में रहते थे।साथ में रहते है तो एक दूसरे को सहन करना होता है।एक दूसरे को समझना होता है।जो सामंजस्य बैठाना जानता है वही जीवन की कला सीख पाता है।नकारात्मक बातो को भूलना बेहतर होता है।वर्तमान में अलग रहना सुखी जीवन का कारण समझा गया लेकिन उससे समस्याए ज़्यादा बढ़ गई।सबसे पहले ख़ुद को समझना ज़रूरी है।जिसने यह सीख लिया उसके जीवन में आनंद ही आनंद होता है।हर व्यक्ति अपने दिल दिमाग़ को खुला रखे।जीवन में समस्याए आएगी और चले जाएगी।समस्या को अपने ऊपर हावी न होने दे।दिल दिमाग़ संकीर्ण होने से जीवन में तनाव,घुटन,झगड़े की परिस्थिति बनी रहती है।व्यक्ति के बोलने के लहजे से भी प्रतिक्रिया पैदा होती है इसीलिए अपने वाणी का विवेक रखें ।
ज़ोनलट्रेनर श्रीमती प्रियंका जैन ने अपने विचारो की अभिव्यक्ति देते हुए कहा -अहंकार,ईर्ष्या,विचारो का मत भेद -इस प्रकार के जंज़ीरो में जकड़े हुए सोच से परिवार में और समाज में दूरी पैदा होती है।ज़रूरी है कि आपसी तालमेल बैठाने के लिए एक दूसरे के कार्य की अहमियत को महत्व देना सीखे।एक दौरे के प्रति आपसी सहयोग एवं सौहार्द का भाव होना ज़रूरी है।उन्होंने रिश्तों की दूरी कम करने के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया। अभातेयुप के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष विकास जी बोथरा ने विषय के महत्व को बताते हुए वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर अपने सारगर्भित विचार की अभिव्यक्ति दी।
तेयुप संगठन मंत्री राजू दुगड़ ने जानकारी देते हुए बताया-तेरापंथ युवक परिषद के विजय गीत से कार्यशाला का आग़ाज़ हुआ। शाखा प्रभारी दीपचंद जी पुगलिया,तेरापंथ सभा अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा,महिला मंडल अध्यक्षा सरिता सिंघी ने विचार व्यक्त किए।आभार तेयुप सहमंत्री प्रथम कुलदीप गोलछा ने व्यक्त किया ।कार्यक्रम का कुशल संचालन तेयुप मंत्री मुदित पींचा ने किया ।

