Hiroshima Nagasaki Nuclear Attack : Radiation Level In Hiroshima Nagasaki After Many Years Of Nuclear Blast On Japan By US

टोक्यो : तबाही मचाने वाली अपार शक्ति और लोगों को बीमार कर देने वाला रेडिएशन, परमाणु बमों से पूरी दुनिया यूं ही नहीं डरती। एक बार विस्फोट होने पर परमाणु बम का असर कई साल तक लोगों को परेशान कर सकता है। 6 और 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के दो शहरों, क्रमशः हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इन हमलों में 1,10,000 से 2,10,000 लोग मरे थे। ये मौतें भयानक ब्लास्ट, जोरदार आग और जहरीले रेडिएशन की वजह से हुईं। धमाका और सीधे प्रभाव के अलावा आज बात रेडिएशन की करेंगे जो परमाणु बम को अन्य बमों से कई गुना खतरनाक बना देता है।

रैपिड न्यूक्लियर रिएक्शन की वजह से परमाणु हथियारों में विस्फोट होता है। इस रिएक्शन में परमाणु या तो अलग हो जाते हैं या एक साथ जुड़ जाते हैं। इससे रेडियोएक्टिव कण और गामा जैसी हानिकारक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें बाहर निकलती हैं। ये न सिर्फ ब्लास्ट के तुरंत बाद बल्कि रेडिएशन के रूप में लंबे समय तक लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोएक्टिव कण वातावरण में जाते हैं और धरती पर वापस आते हैं।

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हिरोशिमा और नागासाकी में आज भी रेडिएशन?
रेडियोएक्टिव सामग्री समय के साथ खत्म हो जाती है जिसे हाफ-लाइफ के रूप में जाना जाता है। लेकिन इसका क्षरण सामग्री पर आधारित होता है, जिसमें एक सेकेंड या कई दशकों का भी समय लग सकता है। तो क्या इसका मतलब है कि हिरोशिमा और नागासाकी आज भी रेडियोएक्टिव हैं? इसका जवाब है- नहीं। हिरोशिमा और नागासाकी में विस्फोट के बाद रेडिएशन मौजूद था जो तेजी से खत्म हो गया।

24 घंटे के भीतर 80 फीसदी कम हो गया खतरा
हिरोशिमा शहर की स्थानीय सरकार की वेबसाइट के अनुसार, रिसर्च ने संकेत दिया कि बमबारी के 24 घंटों के भीतर 80 फीसदी रेडिएशन का क्षरण हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आम वैज्ञानिक सहमति यह है कि ज्यादातर रेडिएशन जल्दी ही खत्म हो गया होगा। यह 24 घंटे में 1/1000 और एक हफ्ते में 1/10,00,000 तक नीचे आ गया होगा। आज दोनों शहरों में घनी आबादी है और वहां रेडिएशन का स्तर ‘सामान्य’ है।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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