Russia T 90 Tank Indian Army: Ukraine Become Graveyard Of Russian Tanks T 72 & T 90 Upending Armour Doctrines For Indian Army

कीव: रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण जंग खत्‍म होने का नाम नहीं ले रही है। इस भयानक युद्ध में पुतिन की सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और यूक्रेन की सड़कें तो रूसी टैंकों का कब्रिस्‍तान बन गई हैं। पूरी दुनिया में अपनी जोरदार ताकत के लिए चर्चित T-72, T-90 जैसे टैंक पश्चिमी देशों की एंटी टैंक मिसाइलों के आगे ढेर हो जा रहे हैं। इससे अब यह खतरा सताने लगा है कि क्‍या मध्‍यकालीन युग के युद्धों की जान कहे जाने वाले हाथियों की तरह से टैंक भी भविष्‍य की जंग से लापता हो जाएंगे। यूक्रेन में रूसी टैंकों का कब्रिस्‍तान बनना भारत समेत पूरी दुनिया में युद्ध के मैदानों की रणनीति को बदलने वाली घटना साबित हुआ है।

टैंक दूसरे विश्‍वयुद्ध के समय से ही आधुनिक युद्धों की शान रहे हैं लेकिन हमलावर ड्रोन विमानों और एंटी टैंक मिसाइलों के सफल इस्‍तेमाल ने उनके भविष्‍य पर सवालिया निशान लगा दिया है। टी-72 और टी-90 टैंक भारतीय सेना की जान रहे हैं और हजारों की तादाद में इन्‍हें सेना में शामिल किया गया है। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की जंग में रूस के करीब 1400 टैंकों के या तो नष्‍ट होने या कब्‍जा किए जाने की पुष्टि हो चुकी है। इन्‍हें अमेरिक की जेवलिन, स्‍वीडन और ब्रिटेन के एनएलएडब्‍ल्‍यू एंटी टैंक मिसाइलों तथा ड्रोन विमानों की मदद से यूक्रेन की सेना ने नष्‍ट किया है।

इसे साल वर्ष 1967 में इजरायल की सेना की ओर से 6 दिन के युद्ध में मिस्र, सीरिया और जॉर्डन की सेना को तबाह किए जाने के बाद सबसे बड़ा टैंकों का नुकसान बताया जा रहा है। वह भी तब जब रूस के पास ज्‍यादा आधुनिक हथियार हैं। रूसी टैंकों के फेल होने की वजह तकनीक है या रणनीति, इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है। यह भी सवाल किया जा रहा है कि क्‍या टैंक अब एक महंगा बोझ बन गए हैं। साथ ही कहा जा रहा है कि रूसी टैंकों का इस्‍तेमाल करने वाला भारत भविष्‍य की जंग के लिए अब खुद को कैसे तैयार करेगा।

रूसी टैंकों के फेल होने पर विशेषज्ञ बंटे हुए हैं। सैन्‍य विशेषज्ञ रॉब ली का मानना है कि समस्‍या टैंकों में नहीं बल्कि उन्‍हें तैनात करने, प्‍लानिंग और इन्‍फैंट्री से पर्याप्‍त सहयोग नहीं मिलने में है। इससे पहले सोवियत संघ की सागेर 9M14 मलयुक्‍ता मिसाइल ने योम किप्‍पूर के युद्ध में इजरायल के टैंकों को तबाह करके रख दिया था। इससे सीखते हुए इजरायल ने बड़े पैमाने पर हथियारों से लैस मेरकावा टैंकों को बनाना शुरू किया। इजरायल के इस टैंक से निपटने के लिए लेबनान के छापामारों ने तोप के गोलों की तरह के जाल बिछाने शुरू कर दिए।

रॉब ली कहते हैं कि यूक्रेन भले ही रूसी टैंकों को तबाह कर रहा हो लेकिन वह खुद पश्चिमी देशों से टैंकों की मांग कर रहा है। उन्‍हें पता है कि इन टैंकों को हिमार्स जैसे रॉकेट लॉन्‍चर से मदद मिलेगी। वहीं कुछ अन्‍य रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध ने तकनीक की मदद से जंग लड़ने के पक्ष में मूलभूत बदलाव कर दिया है। अब भारी हथियार की जगहों पर स्‍मार्ट हथियारों की जंग में ज्‍यादा जरूरत है। टैंक के साथ-साथ फाइटर जेट और युद्धपोत भी अब जंग के ल‍िहाज से पुराने पड़ रहे हैं। इस बहस का कोई आसान जवाब नहीं है।

इस बारे में भी बहुत कम संदेह है कि रूसी सेना ने गलती की होगी। यह जरूर हुआ है कि रूसी टैंक कीचड़ में फंस गए और उन्‍हें आसानी शिकार बनाया गया। रूस के 1400 टैंकों में से एक तिहाई तो तेल की कमी या कलपुर्जे नहीं होने की वजह से चालक दल ने छोड़ दिए। इसके अलावा रूसी टैंकों का डिजाइन ऐसा है कि उसे अमेरिकी मिसाइलें आसानी से निशाना बना रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीक को देखते हुए टैंकों को आधुनिक बनाना होगा तभी वे जंग में दुश्‍मन से बचकर लड़ पाएंगे। उन्‍हें इलेक्‍ट्रोनिक आंख और कान देने होंगे ताकि वे खतरों की पहचान कर सकें।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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