नई दिल्ली: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोमवार को एक बार फिर केंद्र सरकार को कोरोना महामारी से निपटने में फेल बताते हुए सवाल उठाए हैं। प्रियंका गांधी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने लोगों की जान बचाने को अपनी प्राथमिकता ही नहीं समझा, सरकार सिर्फ कोरोना के आंकड़ों को छुपाने में और प्रोपेगेंडा में लगी रही। इनके लिए देशवासियों की जान से ज्यादा अहम प्रोपेगेंडा करके अपनी छवि बचाना है। प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर कई शहरों में जारी डेथ सर्टिफिकेट की संख्या और मौत के सरकारी आंकड़े में फर्क पर सवाल किए हैं। प्रियंका गांधी ने कहा है कि पहली लहर के दौरान आंकड़ों को सार्वजनिक ना करना, दूसरी लहर में इतनी भयावह स्थिति पैदा होने का एक बड़ा कारण था। जागरूकता फैलाने की बजाय सरकार आंकड़ों में हेरफेर करती रही। जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आंकड़ों की पारदर्शिता जरूरी है कि क्योंकि इससे ही पता लगता है- बीमारी का फैलाव क्या है, संक्रमण ज्यादा कहां है। इसके बाद ही सही रणनीति बनती है कि कैसे इससे निपटना है लेकिन ये सब नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार कोविड डाटा में पारदर्शिता रखती तो स्थिति इतनी भयावह स्थिति नहीं होती। गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, बडोदा में जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्रों और सरकारी आंकड़ों में कोरोना से हुई मौतों की संख्या को शेयर करते हुए प्रियंका ने कहा कि डाटा में गड़बड़ की गई है। दूसरी लहर के दौरान गुजरात में 71 दिनों में 1,24,000 मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए लेकिन गुजरात सरकार ने सिर्फ 4,218 कोविड मौतें बताईं। अमहदाबाद में 13,593 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए, सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 2,126 मौतें बताई गईं। सूरत में 8,851 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए और सरकारी आंकड़ें में 1,074 मौतें दर्ज हुईं। राजकोट में 10,887 डेथ सर्टिफिकेट जारी हुए लेकिन आंवड़ों में सिर्फ 208 मौतें हैं।


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