शुद्ध भाव से करें तप -मुनि प्रशांत
कटिहार (बर्धमान जैन): मुनिश्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में श्री श्रेयांस पुगलिया -आठ, श्रीमती सुधा सुराणा -आठ, श्रीमती रेखा बैंगवानी-नौ , श्रीमती प्रियंका बैंगाणी -नौ की तपस्या का अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – तपस्या श्रेष्ठ उपाय है पिछले जन्मों के पाप को क्षय करने के लिए। इससे पुण्य भी बढ़ता है। तपस्या शुद्ध भाव से करनी चाहिए। तभी वह सार्थक बनेगी। कामना की भावना न रहे। चमत्कार, कामना की भावना तपस्या के महत्व को कम कर देती है। हमारा लक्ष्य आत्मशुद्धि का होना चाहिए। निष्काम भाव से ही साधना करनी चाहिए। धर्म साधना में भावना सम्यक होने से ही उसका यथार्थ लाभ होता है।
मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा – मनोबल जिसका मजबूत होता है वहीं व्यक्ति खाने में संयम कर सकता है। जिनशासन में छोटे छोटे बच्चे भी तपस्या करके अपनी आत्मा का कल्याण कर रहे है।सभी तपस्वी इसी धर्म के पथ पर आगे बढ़ते रहे। परिवार के धार्मिक संस्कार एवं चारित्र आत्माओं का योग बहुत बड़ा सहायक होता है।
हनुमान नाहटा ने बताया – गौतम सुराणा,पुगलिया परिवार,बैंगाणी परिवार, बैंगवानी परिवार ने गीत के द्वारा अभिव्यक्ति दी। सभा से हनुमान नाहटा ने मंगल भावना व्यक्त की अनेकों श्रावक श्राविकाओं ने तेले की बोली से साहित्य द्वारा अभिनंदन किया।

