सामाजिक न्याय के पैरोकार बी पी मंडल

मण्डल जी के पुण्यतिथि 13अप्रैल पर शत शत नमन व विनम्र श्रद्धांजलि

पटना: सामाजिक परिवर्तन की प्रवाह को निर्णायक मोड़ देने वाले महापुरुषों में व आजादी के बाद देश की राजनीती को नई दिशा देने वाले लोगों में विन्धेश्वरी प्रसाद मंडल का नाम अग्रण्य है। बी पी मण्डल का जन्म 25 अगस्त 1918 को मधेपुरा बिहार के जमींदार परिवार में हुआ था, आपके पिता रास बिहारी मण्डल स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे, आपके पिता जी ने बिहार समेत समूचे देश के यादवों की शक्ति को एक सूत्र में पिरोने के लिए अखिल भारतीय गोप महासभा की स्थापना किया जो बाद मे यादव महासभा कहलाया तथा सर्वप्रथम 1917 मे मांटेग्यू चेम्सफोर्ड समिति के सामने यादवों को प्रशासनिक सेवा में आरक्षण देने की मांग रखी। बात उन दिनों की है जब बिहार की राजनीती में जातिवाद अपने चरम पर थी, बिहार की राजनीती में ब्राह्मणों, भूमिहारों व राजपूतों का दबदबा था तथा मुख्यमंत्री की जाति से बिहार की राजनीती तय होती थी, तमाम विरोधों व राजनितिक उठापटक के बीच 1फरवरी 1968 को बी पी मण्डल ने बिहार के 7 वें व पहले यादव मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लिया ठीक इस बीच बरौनी रिफायनरी में तेल का रिसाव हो गया और गंगा जी में आग लग गयी तब प्रतिक्रिया स्वरूप पंडित विनोदानंद झा ने कहा कि “शूद्र मुख्यमंत्री बन बैठा है तो गंगा में आग तो लगेगी ही ”

बिहार के प्रथम विधानसभा में बी पी मण्डल ने यादवों के लिए ग्वाला शब्द के प्रयोग पर आपत्ति किया तब विधानसभा अध्यक्ष व अन्य नेताओं ने कहा कि ग्वाला शब्द तो शब्दकोष में है यह असंसदीय कैसे हो गया / बी पी मण्डल के तर्कपूर्ण आपत्ति के पश्चात ग्वाला शब्द के प्रयोग को असंसदीय मान लिया गया

भारतीय समाज जीवन में बी पी मण्डल जी का सबसे बड़ा योगदान सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े देश की आधी आबादी को शासकीय सेवा व शैक्षणिक संस्थानों में 27%आरक्षण दिलाना है, आजादी के बाद से ही सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टि से पीछे पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए मांग उठने लगी थी, मगर केंद्र में बैठे सरकारों के टालमटौल रवैये से इस वर्ग के उत्थान के लिए ठोस कार्यक्रम नही बन पाया / 1 जनवरी 1979 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई ने बी पी मण्डल की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यी द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया, मण्डल जी ने दो वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हुए उन राज्यो में निवासरत जातियों के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक स्तर का अध्ययन करके एक विस्तृत रिपोर्ट 1980 में सरकार को सौप दी, मण्डल आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग 3743 जातियों मे विभक्त है और SC/ST को जैसे आरक्षण मिलता है वैसा ही अन्य पिछड़ा वर्ग को भी मिलना चाहिए तथा पदोन्नति मे भी आरक्षण मिलना चाहिए। इस वर्ग के उत्थान के लिए मण्डल आयोग ने अपनी रिपोर्ट मे 17 अनुशंसा किया था /13 अगस्त 1990 को केंद्र की राष्ट्रीय मोर्चा की विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार ने इन 17 सिफारिशों मे केवल एक सिफारिश शासकीय सेवा व शैक्षणिक संस्थानों मे अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण लागू कर दिया।

जैसे ही विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 27% आरक्षण लागू किया, आरक्षण विरोधी लोग बड़ी संख्या मे इसके विरोध मे सड़कों पर उतर आए देश मे आग लग गयी, हड़तालों, आगजनी, तोड़फोड़, आत्महत्या का सिलसिला शुरू हो गया और उस आरक्षण विरोधी आग को हवा दे रहे थे वे तमाम राजनैतिक पार्टियां जो यह नही चाहते थे कि पिछड़ी जाति के लोगों को आर्थिक, शैक्षणिक क्षेत्र में समानता का अधिकार मिले, मामला देश के सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा और अंततः सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम एच कानिया की अगुवाई वाली पेनल मे बहुमत से क्रीमीलेयर (2 लाख सालाना आय ) की बाध्यता के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण की हरी झंडी दे दी।

वी पी मण्डल आज हमारे बीच नही हैं लेकिन उनकी आवश्यकता तब तक रहेगी जब तक की अपने मूल अधिकारों(समानता का अधिकार) से वँचित एक विशाल आबादी को उसका अधिकार प्राप्त नही हो जाता।

पटना से रामजी प्रसाद की रिपोर्ट Yadu News Nation

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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