खमतखामणा का आयोजन

क्षमा जीवन का अमृत – मुनि प्रशांत

सिलीगुड़ी (वर्धमान जैन): मुनि श्री प्रशांत कुमार जी मुनि कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में क्षमापना पर्व मनाया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा – क्षमा जीवन का अमृत है। इसे अपनाने वाला स्वयं भी स्वस्थ और सुखी रहता है।दूसरे लोग भी उसे सदा प्रसन्न रहते हैं। जैन धर्म में प्रचलित खमतखामणा का महापर्व संसार के सारे पर्वों में अद्भुत पर्व है। क्षमा मांगना फिर भी आसान है किंतु दूसरों की भूलों को क्षमा करना अधिक कठिन है। क्षमापना पर्व का यह संदेश है कि तुम अपनी भूलों को सरलता से स्वीकार करो और दूसरों की भूलों को क्षमा करके अपने मन से उनकी भूलों को निकाल दो। यह मैत्री का पर्व है। आजकल फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है लेकिन यह असली फ्रेंडशिप डे है। आज हम औरों के साथ मैत्री को स्थापित करें, और मैत्री से अपने जीवन को सुखी एवं आनंदमय बनाएं। दूसरों के द्वारा किए गए दुर्व्यवहार को लेकर मन मस्तिष्क में गांठे रखने वाला मनुष्य मानसिक दृष्टि से अस्वस्थ हो जाता है। उसके दुष्परिणाम उसी को भोगने पड़ते हैं। हम आपस में भेद की दीवारें खड़ी न करें। सबके दिलों को जोड़ने का प्रयास करें। अपने विचार को सकारात्मक बनाकर कलह को टाला जा सकता है। हमारे मन में सबके प्रति मैत्री का भाव रहना चाहिए। सबके कल्याण की हम कामना करें। परम पूज्य गुरुदेव की अनुकंपा, कृपा, उनके आशीर्वाद से हम आध्यात्मिक साधना कर रहे है। तेरापंथ धर्म संघ के साधु साध्वी ,अन्य संप्रदाय के साधु-संतों और संपूर्ण हमारा जो विनीत श्रावक समाज है उनसे खमतखामणा करके अपने आप को हल्का बना रहा हूं। हम सभी इस महापर्व का महान उद्देश्य है उसे समझे जाने और अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास करें।

मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने कहा – मन की गहराई में जमे नफरत के भावों को नष्ट किए बिना केवल औपचारिक क्षमा याचना से कोई लाभ नहीं होता। रोग ,आग, तथा वैर इन्हें प्रारंभ में ही नष्ट कर देना चाहिए। क्रोध तथा अहंकार , मैत्री एवं सद्भावना को पनपने में अवरोध बनते है। क्षमा का आदान-प्रदान करना हमारी साधना के विकास का हेतु बनता है। क्षमा का महान पर्व हमारी चेतना को जगाने का पर्व है। क्षमा के द्वारा ही मोक्ष की साधना हो सकती है। हम खमतखामणा को औपचारिक रूप से नहीं मन से करने का प्रयास करें और जिनके साथ मन- मुटाव हुआ है।वैर -विरोध का भाव चल रहा है।बोलचाल बंद है, हम सबसे पहले उससे मन के साथ खमतखामणा करे।यह हमारी अध्यात्मिक साधना का उद्देश्य है तथा जीवन की सार्थकता है।

तेरापंथ सभा अध्यक्ष रुपचंद कोठारी, तेरापंथ युवक परिषद् अध्यक्ष नरेश धाडेवा, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती संगीता घोषल, अणुव्रत समिति अध्यक्षा श्रीमती डिम्पल बोथरा, टीपीएफ उपाध्यक्ष महावीर बैद,तेरापंथ भवन के ट्रस्ट अध्यक्ष महेंद्र डागा, वर्धमान एजुकेशन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष मदन मालू, मर्यादा मैत्री भवन चेयरमैन बाबूलाल लूणावत ने गुरुदेव, मुनि श्री एवं समस्त श्रावक समाज से खमतखामणा किए। कार्यक्रम का कुशल संचालन सभा मंत्री मदन संचेती ने किया। सम्पूर्ण श्रावक समाज ने परस्पर खमतखामणा किए।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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