मुम्बई: जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस मिलिंद जाधव की पीठ ने 5 नवंबर को बार्क की अनुशासनात्मक परिषद के 31 जुलाई को जारी आदेश को रद्द कर दिया। इसे पहले बार्क के वकील ने कोर्ट को बताया था कि परिषद कंपनी को फिर से सुनने को तैयार है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराए पांच लाख रुपये निकालने की इजाजत दे दी। बार्क की मेजरमेंट साइंस टीम द्वारा उपलब्ध आंकड़ों में दर्शकों की संख्या में असामान्य वृद्धि दिखने के बाद याचिकाकर्ता को 27 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कंपनी पर जुर्माना लगाया गया था।

