भिवंडी, (सुरेश यादव): भिवंडी के ग्रामीण इलाको मे भारी संख्या मे वेयर हाउस है, जहा पर रोजगार के बहुत अवसर है। वेयरहाउस मे सिक्युरिटी गार्ड, लेबर और ड्राइवर लोगो की भारी संख्या मे जरूरत होती है यहा के सभी वेयरहाउस मे लेबर कॉन्टैक्टर के अंडर मे ही सिक्युरिटी गार्ड, लेबर और ड्राइवर काम करते है इन वेयरहाउस मे काम करने वाले सिक्युरिटी गार्ड, लेबर और ड्राइवर के साथ हमेशा धोखाधड़ी होती है। रजिस्टर्ड ठेकेदार वेयरहाउस से ठेका लेने के बाद किसी गैर पंजीकृत और अन ट्रेंड ठेकेदार को ठेका दे देता है यह ठेकेदार आजकल शहर और ग्रामीण के राजनीतिक दल और नेताओ के नाम पर रोजगार मेला का जगह जगह आयोजन कर रहे है। रोजगार मेला के लिए लगाए गए पोस्टर मे अच्छी पगार, आने जाने के लिए बस की सुविधा, निशुल्क स्वास्थ्य सेवा, ओवर टाइम पर खाना फ्री जैसे बात लिखकर बेरोजगार को अपने जाल मे फंसाते है पोस्टर देखकर रोजगार मेला मे भारी भीड भी होती है रोजगार मेला के बाद नौकरी पर रखे गए लोगो के साथ एक माह बीतने के बाद पगार देने के समय धोखाधड़ी का काम शुरू हो जाता है। पुलिस बेरिफिकेशन के नाम पर पांच सौ रुपए, बस का किराया और ओवर टाइम के दौरान दिए गए खाने का पैसा काट लिया जाता है। अधिकांश ठेकेदार तो डेढ माह बीत जाने के बाद ही पगार देते है और सिर्फ एक माह की पन्द्रह दिन की पगार अपने पास रोककर रखते है जो शायद कभी भी मजदूर को नही मिलती, बेरोजगार मेला मे कभी-कभी चीटर ठेकेदार भी रहते है जो मजदूर से एक महिने काम कराने के बाद मेन कॉन्टैक्टर से सभी मजदूर का पैसा लेकर भाग जाते है मजदूर एक दो दिन इधर-उधर ढूढने के बाद खामोश बैठ जाता है। भिवंडी के बहुत बेरोजगार युवा इस तरह से ठगी के शिकार हुए है भिवंडी के राजनीतिक दल अथवा नेता को चाहिए कि बेरोजगार मेला आयोजित करने वाले लेबर कॉन्टैक्टर के चाल चरित्र चेहरे की पहले पहचान कर ले अपनी राजनीति के चक्कर मे अपने शहर के युवाओ की मजबूरी का फायदा उठाकर किसी चीटर को संरक्षण देना अच्छी बात नही है, लोग तो यहा तक कहने लगे है कि बेरोजगार के साथ होने वाली धोखाधड़ी मे नेताओ का भी शेयर रहता है क्योंकि ठगी के शिकार होने पर जब यह युवक इन नेताओ के पास जाते है तो उनकी मदद करने के बजाय गोलमोल जवाब देकर वापस कर देते है। भिवंडी के विभिन्न इलाको मे बेरोजगार युवको की संख्या अधिक है और इन्ही इलाके मे स्थानीय नेताओ के बैनर तले रोजगार मेला आयोजित किया जाता है, जहा से बेरोजगार युवको को ठगने का सिलसिला शुरू होता है।

