● लांजीगढ़ में कैसे बदल रहा है कानून!
लांजीगढ़: कोरोना की बढ़ती संक्रमण और एक व्यक्ति की मौत के मद्देनजर स्थानीय लोग लांजीगढ़ को शटडाउन करने की मांग कर रहे थे। लेकिन लोगों की मांगों को नजरअंदाज कर दिया जाता था। ऐसी चर्चा थीं कि वेदांत कंपनी के लाभ के लिए लोगों को खतरे में धकेला जा रहा है। अंत में कालाहांडी जिला प्रशासन ने मांगें मान लीं। लांजीगढ़ में आश्रम पड़ा को कन्टेनमेंट जोन घोषित किया गया है, जबकि निकटवर्ती स्कूल पड़ा को बफर जोन घोषित किया गया है। रविवार को ब्लॉक प्रशासन और शहर के लोगों के बीच संवाद के चलते और स्थानीय लोगों की चिंताओं को देखते हुए लांजीगढ़ तहसीलदार ने जिला प्रशासन को लांजीगढ़ शहर को कन्टेनमेंट जोन घोषित करने की सूचना दी। नतीजतन, जिला और ब्लॉक प्रशासन दोनों के इशारे पर लांजीगढ़ पंचायत अधिकारियों ने शहर के आश्रम पड़ा और स्कूल पड़ा में बैरिकेड्स लगा दिए हैं। लांजीगढ़ सरपंच मणि माझी, पंचायत निर्वाही अधिकारी परमेश्वर सेनापति, जोगाण सहायक राजेंद्र कुमार महाकुड़ ने कन्टेनमेंट जोन और बफर ज़ोन का दौरा किया और लोगों को इसके बारे में जानकारी दी। इसी तरह, डॉ० नरेंद्र कुमार दास के नेतृत्व में एक स्वास्थ्य टीम ने पीड़ितों से चर्चा की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। हालांकि, लांजीगढ़ में आश्रम पड़ा के अलावा, शहर में अन्य पड़ा और बस्तियों में कोरोना आक्रांत लोग होते हुए भी उसमे कोई पावंदी नहीं है। राज्य, जिले या ब्लॉक के अन्य क्षेत्रों में, ज्यादा कोविड पॉजिटिव केस निकलने पर पूरे क्षेत्र को सील और प्रतिबंधित किया जा रहा है, लेकिन लोग सवाल कर रहे हैं कि लांजीगढ़ में कानून कैसे बदल रहा है? एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में, लांजीगढ़ में राज्य के बाहर और राज्य के विभिन्न जिलों से लोगों के आनाजाना लगा रहता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। जागरूक नागरिकों की राय है कि इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। लोगों को लगता है कि यह सब वेदांत के लिए अनुचित सहानुभूति के कारण चल रहा है। स्थानीय लोगों ने लांजीगढ़ के लोगों के खिलाफ इस तरह की भेद नीति को बंद करने और शहर में एक कोविड परीक्षण केंद्र की स्थापना की मांग की है।
लांजीगढ़ से दुखीश्याम नाग (नीलेश) की रिपोर्ट Yadu News Nation

