कटिहार (बर्धमान जैन): मुनि श्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में दीपावली अनुष्ठान द्वितीय दिवस आराधना गणधर गौतम स्वामी का रहा। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – इंद्रभूति गौतम के नाम से प्रसिद्ध हुए। तीनों भाई वेदों के ज्ञाता थे। गणधर गौतम भगवान महावीर के पास दीक्षित हुए एवं उनके प्रति पूर्ण समर्पित होकर रहे। भगवान महावीर के प्रति अटूट श्रद्धा भक्ति भाव रहा।लब्धियों के भण्डार थे। गणधर पदवी प्राप्त होने के बाद लब्धियों की प्राप्ति हुई। अमृत के भण्डार से सम्पन्न थे। विशिष्ट एवं महान व्यक्तित्वशाली पुरुष थे गौतम स्वामी। दीपावली के समय उनका जप करना चाहिए एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन भी उनका जप करना चाहिए।

मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा – गणधर गौतम स्वामी की तरह हम भी अपने अहंकार एवं मोह को छोड़ें।इन दोनों को कमजोर करने का सतत प्रयास करें। शक्ति सम्पन्न बनूं। अपनी आत्मा का कल्याण करु। भगवान महावीर के पहले शिष्य, पहले गणधर गौतम स्वामी बहुत बड़े शास्त्रों के ज्ञाता थे। दीक्षा के बाद अहंकार उन्हें छू भी नहीं पाया। जैन शासन में गौतम स्वामी का महत्वपूर्ण, गरिमामय स्थान है। गौतम स्वामी की तरह ज्ञान से परिपूर्ण बनें।दीपावली पर बाहरी सफाई के साथ- साथ हम अपने भीतर की सफाई करें। अपनी आत्मा को प्रकाशित करें।

