कलाहांडी (लींगराज मिश्र): कलाहांडी के युवा लेखक एवं शोधकर्ता सुधीर कुमार धंगड़ामाझी को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 14 से 16 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ‘बृहत्तर भारत’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारत्स कल्चरल कनेक्शंस अक्रॉस द ग्लोब’ में अपना शोधपत्र प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) द्वारा आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 1926 में स्थापित ग्रेटर इंडिया सोसाइटी की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय की ग्लोबल एंगेजमेंट स्कीम के तहत आयोजित इस सम्मेलन में 50 देशों के प्रतिनिधि, राजदूत और विद्वान भारत के विश्व के साथ ऐतिहासिक एवं समकालीन सांस्कृतिक संबंधों पर विचार-विमर्श करेंगे। चीन, जापान, मंगोलिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका, नेपाल और ईरान सहित विभिन्न देशों के प्रतिभागी साझा सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत आदान-प्रदान पर चर्चा में भाग लेंगे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

सुधीर सम्मेलन में ‘फ्रॉम महानदी टू मेलाका: मैपिंग द मैरीटाइम ट्रेड रूट्स ऑफ कलिंग साधबस’ शीर्षक अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। उनका अध्ययन प्राचीन कलिंग और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाले ऐतिहासिक समुद्री व्यापारिक नेटवर्क का विश्लेषण करता है। इसमें विशेष रूप से आंतरिक व्यापार मार्गों, नदी तंत्र और समुद्री व्यापारिक नेटवर्क के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया गया है।
इस शोध की एक महत्वपूर्ण विशेषता कलाहांडी और उसके प्राचीन असुरगढ़ को कलिंग के व्यापक समुद्री व्यापारिक भूगोल से जोड़कर देखने का प्रयास है। असुरगढ़ से सांदुल, तेल और महानदी नदी तंत्र होते हुए बंगाल की खाड़ी और वहां से मलक्का जलडमरूमध्य तक संभावित ऐतिहासिक संपर्कों का अध्ययन करते हुए शोध में यह समझने का प्रयास किया गया है कि आंतरिक व्यापारिक केंद्र और नदी मार्ग किस प्रकार व्यापक व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संपर्कों से जुड़े रहे होंगे।
यह अध्ययन साधबों को केवल समुद्र के रास्ते व्यापारिक वस्तुओं का परिवहन करने वाले व्यापारियों के रूप में नहीं, बल्कि विचारों, आस्थाओं, तकनीकों और सांस्कृतिक परम्पराओं के वाहक के रूप में भी देखता है। इस प्रकार शोध ओडिशा के समुद्री इतिहास को केवल तटीय व्यापारिक केंद्रों तक सीमित न रखकर उसके आंतरिक क्षेत्रों, नदी मार्गों और समुद्रपारीय व्यापारिक दुनिया के बीच संभावित संबंधों को सामने लाने का प्रयास करता है। उनका शोधपत्र सम्मेलन के ‘ट्रेड एंड कॉमर्स ऐज कैरियर्स ऑफ गुड्स एंड आइडियाज’ विषय के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाएगा।
कलाहांडी जिले के नरला ब्लॉक अंतर्गत बुढ़ीपदर गांव में जन्मे सुधीर शोधकर्ता, लेखक, संपादक, उद्घोषक और संस्कृति कर्मी हैं। वर्तमान में वे ओडिशा सरकार के स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग के अधीन वरिष्ठ शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। शिक्षा, भाषा, साहित्य, संस्कृति और इतिहास उनके अध्ययन एवं शोध के प्रमुख क्षेत्र हैं। उनका ओड़िया कहानी-संग्रह ‘खंगार’ वर्ष 2021 में टाइमपास बेस्टसेलर अवॉर्ड से सम्मानित हुआ था तथा 2020 और 2021 में साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार की संक्षिप्त सूची में शामिल हुआ था।

