कलाहांडी का गौरव: वैद्यराज पबित्र शबर को ‘घुमुरा’ महोत्सव में मिला ‘बरपुत्र सम्मान’

भवानीपाटना: निस्वार्थ सेवा और देशज चिकित्सा ज्ञान की जीती-जागती मिसाल पेश करते हुए कलाहांडी जिले के नर्ला ब्लॉक अंतर्गत टोलाब्राह्मणी गांव के वयोवृद्ध पारंपरिक चिकित्सक वैद्यराज पबित्र शबर को २८वें कलाहांडी उत्सव ‘घुमुरा’ के दौरान प्रतिष्ठित ‘कलाहांडी बरपुत्र सम्मान-२०२६’ से नवाजा गया।

लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में रेंडो मांझी मंच पर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जिला कलेक्टर एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने श्री शबर को सम्मानित किया। उन्हें मानपत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके समाज के प्रति असाधारण योगदान की सराहना की गई।

पिछले पांच दशकों से अधिक समय से यह विनम्र वैद्य हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण बने हुए हैं। प्राचीन आयुर्वेदिक परंपराओं से जुड़ी समय-परीक्षित जड़ी-बूटी आधारित दवाओं के माध्यम से उन्होंने कैंसर, किडनी रोग, लीवर विकार, गठिया, रक्त संबंधी बीमारियां जैसी कई जटिल एवं असाध्य बीमारियों का सफल इलाज किया है, जहां आधुनिक चिकित्सा अक्सर सीमित साबित हुई।

कलाहांडी जिले के दूर-दराज इलाकों से लेकर पड़ोसी राज्यों तक के मरीज नियमित रूप से उनके पास पहुंचते हैं, जिससे उन्हें प्यार से कबीराज की उपाधि मिली है। गरीबों का निःशुल्क एवं सरल तरीके से इलाज करने वाली उनकी निस्वार्थ शैली ने उन्हें इस क्षेत्र में जीवंत किंवदंती बना दिया है।

कलाहांडी उत्सव ‘घुमुरा’ जिले की समृद्ध आदिवासी एवं लोक संस्कृति का भव्य उत्सव है, जिसने इस सम्मान के लिए बेहतरीन मंच प्रदान किया। आत्मा को छू लेने वाले घुमुरा नृत्य से लेकर स्थानीय कला-संस्कृति तक, यह महोत्सव समुदाय को गर्व और उल्लास से जोड़े रखता है।

सम्मान की खबर फैलते ही नरम स्वभाव के इस चिकित्सक के लिए हर तरफ से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। कलाहांडी के बुद्धिजीवी, स्थानीय निवासी एवं प्रशंसक अब जोर-शोर से मांग कर रहे हैं कि भारत सरकार वैद्यराज पबित्र शबर को पद्मश्री सम्मान प्रदान करे।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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