दो चरण में हुआ मंगल भावना समारोह
सिलचर (बर्धमान जैन): चातुर्मास की सम्पन्नता पर दो चरण में आयोजित मंगल भावना समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा- सिलचर का ऐतिहासिक चातुर्मास सम्पन्न हो रहा है। चार महीने अध्यात्म का ठाठ लगा रहा। तप, त्याग से जीवन महान बनता है। त्याग करने वाला केवल वस्तु का ही नही अपितु आसक्ति का भी त्याग करता है। त्याग से हमारी चेतना अन्तर्मुखी बनती है। वस्तु त्याग के साथ अपनी बुरी आदतों का भी परिहार करना चाहिए नकारात्मक भाव हमारे व्यवहार को प्रभावित करते हैं। चातुर्मास का समय आत्म जागरण का होता है। चारित्रआत्मा से प्रेरणा प्राप्त कर स्वाध्याय का अभ्यास करना चाहिए जिससे मौलिक एवं यर्थाथ ज्ञान का बोध हो सकें। ज्ञानाराधना से अज्ञान दूर होता है। ज्ञान के अभाव में अनेक भ्रांतिया पैदा हो जाती है। ज्ञान प्राप्त करने के बाद उसका जितना मनन किया जाता है, उतना ही भीतर में परिपक्कता आती है।प्रत्येक श्रावक को अपनी जीवनचर्या में सामायिक साधना का अभ्यास करना चाहिए। श्रावक के बारहव्रत मे सामायिक व्रत का समावेश किया गया जिससे श्रावकत्व की अनुपालना हो सकें।हमारे जीवन में अध्यात्म की भावना पुष्ट बने वैसी भावना करते रहें। सिलचर का श्रावक समाज धर्मसंघ के प्रति समर्पित श्रद्धा, भक्ति-भावना से परिपूर्ण अध्यात्मनिष्ठ है।अपने जीवन में ओर अधिक धर्मनिष्ठ बनें। तेरापंथ सभा, युवक परिषद, महिला मण्डल, टीपीएफ, ज्ञानशाला, स्थानकवासी समाज, मंदिरमार्गी समाज, दिगम्बर समाज,सभी संस्थाओं के पदाधिकारी ने चातुर्मास मे भरपूर लाभ उठाने के साथ अपने दायित्व का अच्छे से निर्वाहन किया।सिलचर के श्रावक समाज में श्रद्धा-भावना उत्साह अनूठा है। आप सब की धर्मनिष्ठ भावना सदैव बनी रहें। साधु-साध्वी की सेवा इसी जागरूकता के साथ करते रहें। यहां चातुर्मास कर हमें परम प्रसन्नता हो रही है। सबके प्रति मंगल भावना।सबसे खमतखामणा।
मुनि कुमुद कुमारजी ने कहा- नदी, हवा बादल एवं पंछी की तरह सन्तजन भी चलते रहते है। वे यायावर बनकर धर्म का बोध देते हैं। साधु श्रावक का जोड़ा होता है। साधु की साधना में श्रावक निमित बनता है तो श्रावक को धर्म का बोध साधु प्रदान करते हैं। चातुर्मास करने का उद्देश्य होता है ज्ञान, दर्शन, चरित्र एवं तप की साधना-आराधना विशेष रूप से हो। भाषणबाजी या मोमेंटो वितरण करना, बडे-बडे कार्यक्रमों का आयोजन से चातुर्मास सफल नही होता है। मुझे सात्विक गर्व है कि सिलचर में इतने कार्यक्रम गुरु कृपा से सानन्द सम्पन्न हुए।ज्ञान, दर्शन चरित्र एवं तप को बढाने वाले श्रावकत्व को मजबूती प्रदान करने वाले एवं जैनत्व को परिपक्क करने वाले आयोजन हुए। जैन समाज का आपसी सौहार्द भाव प्रमोद भाव अनुकरणीय है।सभा ने चातुर्मास की जिम्मेदारी एवं साधार्मिक वात्सल्य का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। युवक परिषद,महिला मण्डल, टीपीएफ के योगदान से चातुर्मास बहुत अच्छा कार्यकारी एवं सुखद रहा। सिलचर का चातुर्मास मेरे लिए सुखद यादगार रहेगा।

मंगल भावना समारोह में तेरापंथ सभा अध्यक्ष नवरतन चौपड़ा, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती रेखा चौरड़िया, युवक परिषद अध्यक्ष पंकज मालू,टीपीएफ अध्यक्ष महावीर प्रसाद बैद, तेरापंथ सभा संरक्षक बुद्धमल बैद,सभा परामर्श मूलचंद बैद,ज्ञानगच्छ अध्यक्ष धनराज बरडिया, साधुमार्गी अध्यक्ष विजय सांड, मंदिरमार्गी समाज से ललित गुलेछा,महिला मंडल सिनियर ग्रुप, महिला मंडल जूनियर ग्रुप,टीपीएफ ग्रुप,समता महिला मंडल, ज्ञानगच्छ महिला मंडल, मंदिरमार्गी महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद मंत्री जैकी मरोठी, प्रतीक सांड, रेखा सेठिया परिवार, पूजा मरोठी, तारा संचेती, सोहनी देवी मरोठी, अंकित -पलक बैद, विजयश्री संचेती,जतनदेवी सामसुखा,भरत दुगड़, मनोरंजन काम्प्लेक्स,मधु दुगड़, रतनी देवी सुराणा, बबिता डागा, जयश्री बैद, शांतिलाल डागा, रतनलाल मरोठी, रामलाल बैद ने गीत एवं वक्तव्य के द्वारा मुनिद्वय को मंगलकामना करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की।अनेक-श्रावक-श्राविकाओं ने त्याग-संकल्प की भेंट मुनिद्वय को दी। दो दिवसीय कार्यक्रम का संचालन सभामंत्री तोलाराम गुलगुलिया ने किया। सम्पूर्ण श्रावक समाज ने भावपूर्ण शब्दो से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मुनिद्वय से क्षमायाचना की।सभा द्वारा धनराज सुराणा का सम्मान किया गया।

