नई दिल्ली, यदु न्यूज़ नेशन: जीएसटी 2.0 लागू होने के बावजूद, नूडल्स, पास्ता, टॉफ़ी और कैंडी जैसी चीज़ें सस्ती नहीं हुई हैं। दुकानदार पुराना स्टॉक होने का बहाना बनाकर ज़्यादा दाम वसूल रहे हैं। इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 सितंबर को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इसकी घोषणा की थी। हालाँकि, नूडल्स, पास्ता, टॉफ़ी, कैंडी, साबुन, शैम्पू, हेयर ऑयल, बिस्कुट, खाने-पीने की चीज़ें और दवाइयाँ जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें सस्ती नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों में असंतोष बढ़ रहा है क्योंकि हर चीज़ पुरानी कीमतों पर बिक रही है। सरकार ने वादा किया था कि 22 सितंबर से सब कुछ सस्ता हो जाएगा, लेकिन छोटे दुकानदार अपना सामान उसी कीमत पर बेच रहे हैं। विक्रेताओं के अनुसार, हम पुराने स्टॉक पर जीएसटी का लाभ कैसे दे सकते हैं? इससे हमें नुकसान होगा। लोगों को सस्ती चीज़ों के लिए 8 से 10 दिन और इंतज़ार करना पड़ सकता है। पुराने स्टॉक के बहाने दवाइयाँ अब पहले जितनी ही कीमत पर बेची जा रही हैं। अगर नया स्टॉक आने के बाद भी दुकानदार पुराना स्टॉक माँगकर मरीजों का शोषण करते रहेंगे, तो सवाल यह है कि जीएसटी में कटौती लागू करने से किसे फायदा होगा? इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन से निगरानी रखने को कहा जा रहा है कि क्या वाकई लोगों को जीएसटी में कटौती का फायदा मिल रहा है। अगर प्रशासन ध्यान नहीं देता है, तो आम नागरिक का पहले की तरह शोषण होता रहेगा। सरकार ने 3 सितंबर को जीएसटी सुधारों की घोषणा की थी। अब सवाल यह उठता है कि इतनी घोषणा के बावजूद दुकानदारों का स्टॉक अभी तक खत्म क्यों नहीं हुआ है? क्या दुकानदार ग्राहकों को जीएसटी में छूट नहीं देना चाहते? सरकार ने कहा है कि अगर कोई दुकानदार ग्राहकों को जीएसटी में छूट का फायदा नहीं देता है, तो उस पर जुर्माना और सजा हो सकती है, लेकिन दुकानदारों पर इसका कितना असर होगा, इसे लेकर आम संशय बना हुआ है।

