आचार्य श्री भिक्षु त्रिशताब्दी वर्ष का शुभारंभ

आचार्य श्री भिक्षु ने दिया विशुद्ध अध्यात्म का बोध -मुनि प्रशांत

सिलचर (बर्धमान जैन): मुनि प्रशांत कुमार जी के सान्निध्य में आचार्य श्री भिक्षु का 300वां जन्मदिवस एवं 268 वां बोधि दिवस का आयोजन हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा – आचार्य श्री भिक्षु के साथ तेरह का योग जुड़ा हुआ है।उनका जन्म एवं निर्वाण दोनों तेरस को हुए। प्रारम्भ में साधु एवं श्रावक की संख्या भी तेरह थी।उस तेरह की संख्या को प्रभु को समर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि “हे प्रभो! यह तेरापंथ।स्वयं द्वारा लिखित मर्यादा को साधु समाज में आत्मसात करवाकर उसे संघ में लागू किया। शिष्यों का कभी मोह नहीं किया। शुद्ध साधना पर जोर दिया। उनकी साधना कठोर थी।उनका चिंतन था कि संघ में जब तक मर्यादा अनुशासन नहीं होगा तब तक साधना सम्यक रूप से नहीं हो पाएगी।18 वीं सदी के महान क्रांतिकारी और दार्शनिक संत थे आचार्य श्री भिक्षु। आत्मशुद्धि के महान लक्ष्य को लेकर चलने वाले आचार्य श्री भिक्षु को अनगिनत कष्टों को झेलना पड़ा था। धर्म के बारे में फैली भ्रांतियों और गलत अवधारणाओं को खत्म कर धर्म का शुद्ध स्वरूप जनता के सामने रखना उनकी धर्म क्रान्ति का उद्देश्य था।आचार्य श्री भिक्षु एवं रामस्नेही संप्रदाय के संत रामचरण जी दोनों ने अध्यात्म का विशुद्ध प्रतिबोध जनता को दिया। जब तक सही गलत का भेद नहीं होता है तब तक व्यक्ति अज्ञान अवस्था में जीता है। महापुरुषों ने अपने जीवन में मानवजाति के कल्याण का ही चिंतन किया है ‌ हमारे भीतर की चेतना अध्यात्ममय बनें। सद्साहित्य का स्वाध्याय भी होना जरूरी है। आचार्य श्री भिक्षु ने प्राप्त बोधि को आत्मसात् किया तभी वें हमारे लिए प्रेरणास्रोत बनें हुए हैं।

मुनि कुमुद कुमार जी ने कहा- आचार्य श्री भिक्षु की सहजता, सरलता एवं विनम्रता ने उन्हें स्वत: बड़ा बना दिया। विरोध का प्रत्युत्तर कभी विरोध से नहीं दिया। सम्यक रूप से सही तत्व प्रस्तुत किया।गृहस्थावस्था से ही अपने आप को तत्व की कसौटी, समता के धरातल पर कसकर अपने वैराग्य को पुष्ट किया। उन्होंने निश्चय नय एवं व्यवहार नय दोनों का जीवंत संदेश साधु साध्वी को प्रदान किया। भगवान महावीर के तत्व को आत्मसात करने के लिए उन्हें मरना भी मंजूर था लेकिन आत्मसाधना पथ से विचलित नहीं हुए। ऐसे परम प्रतापी पुरुष से प्रेरणा प्राप्त कर हम जीवन में आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ते रहे।

तेरापंथ सभा के सहमंत्री शांतिलाल डागा ने बताया कि तेरापंथ महिला मंडल ने भिक्षु म्हारे प्रग्टया रै गीत का संगान किया। सभा उपाध्यक्ष प्रेम छाजेड़, तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष पंकज मालू, तेरापंथ महिला मंडल मंत्री रेखा सेठिया, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के मंत्री विवेक मरोठी, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के कार्यकारिणी सदस्य अशोक मरोठी ने विचारों की अभिव्यक्ति दी। मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने सामूहिक जप का संगान कराया। कार्यक्रम का संयोजन मुनिश्री कुमुद कुमार जी ने किया।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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