किसान मेले में किए गए सम्मानित
नई दिल्ली: पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के लिए कहा जाता रहा है कि वह जिस चीज को छू लेते हैं वो सोना बन जाती है और जहां कदम रखते हैं उनकी हो जाती है। सच ही तो है अनुभवी खिलाड़ियों को दरकिनार करते हुए जब 26 वर्षीय युवा माही को कप्तानी सौंपी गई तो उन्होंने 2007 का टी-20 विश्व कप जीता दिया। 28 साल का सूखा खत्म करते हुए 2011 में भारत को दूसरा विश्व कप दिलाया। क्रिकेट के बाद अब खेती-किसानी में भी रिकॉर्ड्स अपने नाम कर रहे हैं। धोनी को पूर्वी भारत के सर्वश्रेष्ठ गो-पालक का सम्मान मिला। उन्हें यह अवार्ड रांची के बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (BAU) में चल रहे किसान मेले में दिया गया। यहां पूर्वी भारत के किसान और गो पालक का जमावड़ा लगा है। यह सम्मान झारखंड विधानसभा के स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने धोनी के प्रतिनिधि के तौर पर आए उनके कर्मचारी कुणाल गौरव को दिया। कुणाल गौरव ने बताया कि यह उसके लिए गौरव के क्षण हैं कि उसे धोनी के बदले सम्मान लेने का मौक मिला। धोनी अपने फार्म हाउस के गायों से बहुत प्यार करते हैं, वे जब रांची में होते हैं तो दिन में एक बार फार्म हाउस जरूर आते हैं।

