नई दिल्ली: भारत के प्रसिद्ध एयरोस्पेस वैज्ञानिक प्रोफेसर रोद्दम नरसिम्हा का सोमवार रात निधन हो गया, वो 87 वर्ष के थे। साथ ही लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे। पिछले हफ्ते उनको ब्रेन हैमरेज हुआ था। जिसके बाद उन्हें बेंगलुरु के एमएस रमैया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करवाया गया, जहां पर उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी हैं। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर किया जाएगा।
प्रोफेसर नरसिम्हा ने काफी वक्त तक नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (एनएएल) के निदेशक के तौर पर अपनी सेवाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के डिजाइन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तेजस को आज भारत का राफेल कहा जाता है। इसके अलावा वे जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) में DST ईयर-ऑफ-साइंस चेयर प्रोफेसर भी थे।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस साइंसेज (NIAS) के निदेशक के रूप में नरसिंह ने यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और अन्य निकायों के साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर कई प्रमुख संवाद किए। हालांकि फरवरी 2012 में उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष आयोग सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया। वो इस पद पर सबसे लंबे वक्त तक बने रहने वाले सदस्य थे। उनकी काबिलियत को देखते हुए 2013 में भारत सरकार ने उन्हें दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। इसके अलावा 2008 में ट्राइस्टे विज्ञान पुरस्कार (Trieste Science Prize) भी जीता था।

