नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच इंडियन आर्मी ने चीन को माकूल जवाब देने के लिए नई रणनीति तैयार की है। इस नई रणनीति के जरिए भारत अपने दोनों पड़ोसी पाकिस्तान और चीन को आसानी से जवाब दे सकता है। कुछ समय पहले तक, फाइट फॉर्मेशन का फोकस मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा की ओर था। चूंकिं अब वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर वर्तमान में जैसी सक्रियता नहीं थी। सेना के अभियानों का झुकाव ज्यादातार पश्चिमी सीमा की ओर है।
इस बात से समझा जा सकता है कि पश्चिमी सीमा पर तीन स्ट्राइक कॉर्प्स की तैनाती की गई है। जबकि उत्तरी सीमाओं के लिए केवल एक माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाया गया है। एएनआई की खबर के मुताबिक, दोनों मोर्चों की देखरेख के लिए मौजूदा फाइट फॉर्मेशन को दोहरे आधार पर रखा जा सकता है। इससे चीन के साथ जारी संघर्ष के मद्देनजर किसी भी अतिरिक्त बल या नए स्ट्राइक कोर को जुटाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
इस संबंध में विभिन्न प्रस्तावों पर सेना मुख्यालय द्वारा विचार किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न सेना कमांडरों से सुझाव भी मांगे गए हैं। ये कदम इसलिए उठाए गए क्योंकि सेना को लग रहा है कि, एलएसी पर तैयारियों को और बढ़ाने की जरूरत है। सूत्रों ने कहा कि 13 लाख सेना के लड़ने के फॉर्मूले का पुनर्मूल्यांकन एक बड़ी कवायद होगी और उम्मीद की जा रही है कि रक्षा बलों को दोनों मोर्चे के युद्ध के लिए तैयार किया जाएगा।
चीन के साथ चल रहे सीमा संघर्ष में भी, सेना ने कुछ संतुलन बनाए हैं और मध्य और पश्चिमी भारत से बड़ी संख्या में बख्तरबंद सैनिकों को तैनात किया गया है। भारतीय सेना ने लद्दाख सेक्टर चीनी उपस्थिति से अधिक बीएमपी, टी -90 और टी -72 को तैनात किया गया है। चीनी सेना के 60 हजार सेनाओं के खिलाफ भारत ने अपनी तीनों सेनाओं के पर्वतीय डिवीजन में अतिरिक्त बल की तैनाती की है।

