पीएम ऋषि सुनक ने भारतीयों की आलोचना करने वाली सुएला ब्रेवरमैन को बनाया ब्रिटेन का गृहमंत्री

लंदन: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मंगलवार को अपनी कैबिनेट का ऐलान कर दिया। सबको हैरान करते हुए उन्‍होंने सुएला ब्रेवरमैन को ही गृह मंत्री नियुक्‍त किया। ब्रेवरमैन, 45 दिनों तक पीएम रही लिज ट्रस की सरकार में गृहमंत्री बनी थीं। ट्रस कैबिनेट से इस्‍तीफा देने वाली वह पहली मंत्री थी। ट्रस उस समय विवादों में आई थीं जब उन्‍होंने भारत के साथ एक डील का यह कहते हुए विरोध किया था कि उनके देश में गैर-कानूनी तौर से रह रहे भारतीयों की संख्‍या बहुत ज्‍यादा है। ऐसे में यह डील देश के लिए खतरनाक हो सकती है।

42 साल की सुएला ब्रेवरमैन भारत के गोवा की रहने वाली हैं और अटॉर्नी जनरल रह चुकी हैं। ब्रेवरमैन, ट्रस की सबसे बड़ी समर्थक हैं। ब्रेवरमैन, ट्रस की बड़ी समर्थक हैं लेकिन पिछले दिनों उन्‍होंने सुनक का नाम भी समर्थन किया था। 3 अप्रैल 1980 को जन्‍मीं सुएला ब्रेवरमैन के पिता का नाम क्रिस्‍टी और माता का नाम उमा फर्नांडीस था। दोनों ही भारतीय मूल के थे और सन् 1960 के दशक में केन्‍या और मॉरिशस से ब्रिटेन से आए थे।उनकी मां ब्रेंट में नर्स और काउंसलर का काम करती थीं। पिता क्रिस्‍टी जो गोवा के रहने वाले थे वह एक हाउसिंग एसोसिएशन के लिए काम करती थे। उनकी मां का जन्‍म मॉरीशस के तमिल परिवार में हुआ था। ब्रेवरमैन, लंदन में मॉरिशस के पूर्व हाई कमिश्‍नर माहेन कुडानसामी की भांजी हैं।

सुएला ब्रेवरमैन ने पिछले दिनों कहा था कि भारत के साथ होने वाली ट्रेड डील को लेकर उनके मन में कई आशंकाएं हैं। उनकी मानें तो इस डील के बाद यूके में अप्रवासन बढ़ सकता है। जबकि ट्रस चाहती थीं कि दिवाली तक भारत के साथ एक व्‍यापार समझौता साइन कर लिया जाए। भारत सरकार की तरफ से लगातार यह मांग की जा रही है कि भारतीय नागरिकों के लिए वर्क और स्‍टडी वीजा की संख्‍या बढ़ाई जाए। ब्रेवरमैन जो कि खुद एक अप्रवासी हैं जब उन्‍होंने यह इंटरव्‍यू दिया तो उनकी जमकर आलोचना हुई थी।

इंटरव्‍यू में ब्रेवरमैन ने कहा है कि यूके में ज्‍यादा दिन तक रहने वाले वीजा की भारी संख्‍या की वजह से भारतीय शरणार्थियों की संख्‍या में इजाफा हो सकता है। उन्‍होंने भारत के साथ होने वाले इस समझौते का जमकर विरोध किया है। उनका कहना था कि उनसे पहले जो देश की गृहमंत्री थीं प्रीति पटेल, वह गैरकानूनी अप्रवासियों की संख्‍या बढ़ाना चाहती थीं। उनकी मानें तो यह समझौता कोई जरूरी नहीं है और यह सही तरह से काम करेगा, ऐसा भी जरूरी नहीं है।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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