श्रीभूमि असम (बर्धमान जैन): युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री रमेश कुमार जी के पावन सान्निध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में भगवान पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक दिवस पर जप अनुष्ठान का पहली बार भव्य आयोजन हुआ। सकल जैन समाज की भी सहभागिता इस अनुष्ठान में रही। आसपास के श्रद्धालुओ ने अच्छी संख्या में भाग लिया। मुनिश्री रमेश कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी ने भगवान पार्श्वनाथ के प्रभावशाली चयनित मंत्रों के साथ उपसर्गहर स्तोत्र का सामुहिक लय बद्ध जप कराया। मंत्र ध्वनियों से वातावरण गुंजायमान हुआ।

इससे पूर्व मुनि रमेश कुमार जी ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन दर्शन पर विचार व्यक्त करते हुए कहा – भगवान पार्श्वनाथ ने अज्ञान, अंधकार और आडम्बर युक्त क्रियाकांड के मध्य में क्रांति का बीज बनकर जन्म लिया था। उन्होंने हमारे भीतर सुलभ बोधि जगाई, व्रत की संस्कृति विकसित की। बुराइयों का परिष्कार कर अच्छा इंसान बनने का संस्कार भरा। पुरुषार्थ से भाग्य बदलने का सूत्र दिया। भगवान पार्श्वनाथ क्षमा के प्रतीक और सामाजिक क्रांति के प्रणेता हैं। उन्होंने अहिंसा की व्याप्ति को व्यक्ति तक विस्तृत कर सामाजिक जीवन में प्रवेश दिया, जो अभूतपूर्व क्रांति थी। भगवान पार्श्वनाथ के अधिष्ठायक देव धरणेन्द्र व देवी पद्मावती आज भी जिनशासन की सेवा करते हैं।

तेरापंथी सभा के मंत्री विवेक लालाणी ने समाज की ओर से सभी का स्वागत किया। जैन फूलाम गोमछा से आगन्तुक अतिथियों का सम्मान किया। तेरापंथी सभा सिलचर के अध्यक्ष नोरतन जी चौपड़ा, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती रेखा चौरडिया ने सिलचर पधारने का ओर नये साल का मंगल पाठ कार्यक्रम कराने के लिए निवेदन भी किया। स्थानीय दिगम्बर समाज की ओर से संतोष जी जैन ने अपने विचार व्यक्त किए। अनेक भाई बहिनों ने एक साल तक पार्श्वनाथ के मंत्र जप का संकल्प भी किया।

