तेरापंथ युवक परिषद द्वारा भाषण प्रतियोगिता

जीवन में हमारा संतुलित विकास होना चाहिए -मुनि प्रशांत

कांटाबांजी (वर्धमान जैन): मुनि प्रशांत कुमार जी के सान्निध्य, मुनि कुमुद कुमार जी के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा- सबने अच्छी प्रस्तुति दी धर्मसंघ के अच्छे – अच्छे वक्ताओं ने भी प्रारंभ में इसी तरह प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का विकास कर अच्छे वक्ता बन गए। प्रतियोगिताओं से भीतर का भय दूर होता है, स्वयं का आत्मविश्वास जागृत हो जाता है। नम्बर की चिंता नहीं अपनी बात कहना है यह मनोभाव रहना चाहिए। बोलने का विकास होता है, ज्ञान का विकास होता है।नई – नई जानकारी प्राप्त होती है। बोलने का अभ्यास करते है वैसे न बोलने का भी अभ्यास रहना चाहिए। श्रोता बनना भी एक कला है। कैसे सुनना ये एक गुण है। सुनी हुई बात पर चिंतन कर उसे जीवन व्यवहार में लाना ही सुनने की सार्थकता है। बोलना और सुनना दोनों का विकास होने से जीवन में हमारा संतुलित विकास होता है। जिंदगी पर अनेक बड़े – बड़े ग्रंथ लिखे गए। गद्य और पद्य दोनों विधाओं में जिंदगी के बारे में लिखा गया। जिंदगी में बहुत कुछ प्राप्त करके जा सकते हैं या खोकर जा सकते हैं। पुण्य लेकर जाए या पाप ये व्यक्ति के विवेक , चिंतन पर निर्भर करता है ‌ जिंदगी से बहुत सीखा जा सकता है।सबके जीने का अपना -अपना तरीका होता है लेकिन सदुपयोग एवं दुरुपयोग सबका हो सकता है। दृष्टिकोण यह रहे कि कुछ अच्छा प्राप्त करके जाना है। तेरापंथ युवक परिषद ने एक अच्छा आयोजन किया। विकास करने का मौका दिया। ऐसे कार्यक्रमों से श्रावक श्राविकाओं का सर्वांगीण विकास होता है।

मुनि कुमुद कुमार जी ने कहा – ज्ञान का, प्रतिभा का विकास आज कितने ही प्रतिभागियों में देखने को मिला। आज के समय में संस्कार की नितान्त आवश्यकता है। संस्कार के अभाव में व्यक्ति अकरणीय कार्य करते जा रहा है। आधुनिक वातावरण का प्रभाव सोच में, जीवनशैली में आ रहा है जिसके कारण पारिवारिक, सामाजिक एवं धार्मिक वातावरण दूषित हो रहा है। मोबाईल के बढ़ते प्रचलन ने बिखराव,दुराव पैदा करने के साथ व्यक्ति को स्वार्थवादी बना दिया। मोबाईल का नकारात्मक प्रभाव अधिक देखने को मिल रहा है।हम अपने परिवार के प्रति दायित्व को समझें। एक दूसरे के प्रति सहयोग भाव , सामंजस्य, सहनशीलता एवं साथ बिताए गए समय से परिवार खुशहाल रहता है।

मुस्कान इंटरनेशनल स्कूल के चैयरमेन ब्रिजेश मितल ने कहा – जीवन क्या है ? मन में सीखने की लालसा रखना जीवन है। मनुष्य जीवन एक परीक्षा है। व्यक्ति मंजिल को प्राप्त करता है या नीचे जाता है ये जीवन पर निर्भर करता है। तेरापंथ युवक परिषद को बधाई देता हूं जिन्होंने समयानुकुल विषयों के माध्यम से समाज को जीवंत संदेश दिया है। मीडिया प्रभारी अविनाश जैन ने बताया – कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ युवक परिषद के युवाओं के मंगलाचरण से हुआ। ऋषभ के जैन ने प्रस्तुति दी। समय पालक की भूमिका रोहन जैन ने निभाई। आभार ज्ञापन सोहन जैन ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष अंकित जैन ने किया। जूनियर ग्रुप में प्रथम स्थान सुश्री पूजा जरवालिया, द्वितीय स्थान गौरव मंत्री एवं तृतीय स्थान सुश्री सिद्धि जैन। सिनियर ग्रुप में प्रथम स्थान श्रीमती मनीषा मुकेश जैन, द्वितीय स्थान सीमा अग्रवाल, एवं तृतीय स्थान विवेक जैन ने प्राप्त किया। कार्यक्रम के प्रायोजक अजित गोपालदास जैन ने जज ब्रिजेश मितल का सम्मान किया।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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