मानवता के मसीहा थे आचार्य श्री तुलसी -मुनि कुमुद
कांटाबांजी (वर्धमान जैन): मुनि प्रशांत कुमार जी के सान्निध्य में विकास महोत्सव का आयोजन हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनि कुमुद कुमार जी ने कहा – आचार्य श्री तुलसी ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण मानवता के कल्याण में व्यतीत किया। आचार्य श्री तुलसी का जीवन विकास का जीवन था। उन्होंने जागते हुए सपने देखें और उन्हें पूरा किया। जीवन में आने वाले कष्टों एवं बाधाओं को सूझबूझ से दूर किया तथा विकास के नए- नए कीर्तिमान स्थापित किए। वे न केवल तेरापंथ के विकास की बात सोचते थे अपितु समग्र जैन धर्म और मानवता के विकास के लिए कार्य करते थे। पंजाब समस्या को सुलझाने में राजीव- लोंगेवाल समझौता करवाने में और 1994 में देश की संसद में आए अभूतपूर्व गतिरोध को खत्म करवाने में रही उनकी भूमिका सर्वविदित है। उन्होंने राष्ट्र में चरित्रबल को मजबूत करने के उद्देश्य से अणुव्रत आंदोलन चलाया। प्रेक्षाध्यान की पद्धति और शिक्षा के क्षेत्र में जीवन विज्ञान जैसा सुवैज्ञानिक पाठ्यक्रम देश की जनता को दिया। अहिंसा की शक्ति से जनता को परिचित कराया। विसर्जन का सूत्र देकर लोगों में अनासक्त चेतना का निर्माण किया।

राजनैतिक, सामाजिक, शैक्षणिक क्षेत्र में उनके द्वारा दिए अवदानों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उन पर डाक टिकट जारी की ” भारत ज्योति” और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार जैसे सम्मानों से उन्हें नवाजा गया। उनके द्वारा किए गए मानवतावादी कार्यो की एक लम्बी श्रृंखला है। आचार्य श्री तुलसी क्रांतिकारी विचारक थे। उनके चिंतन में विकास परिलक्षित होता था। विरोधों की परवाह न करते हुए अपनी शक्ति को सकारात्मक कार्यों में लगाए रखा। लगभग एक लाख किलोमीटर की पदयात्रा कर उन्होंने अणुव्रत आंदोलन को जन जन तक पहुंचाया।

मीडिया प्रभारी अविनाश जैन ने बताया तेरापंथ सभा अध्यक्ष युवराज जैन, तेरापंथ युवक परिषद से ऋषभ के जैन, तेरापंथ महिला मंडल से श्रीमती स्मिता जैन, संजय जैन ने वक्तव्य एवं गीत के द्वारा प्रस्तुति दी। संघगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

