जींद: भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का नवंबर 2020 से ही आंदोलन चल रहा है। न तो सरकार ने आंदोलनकारियों की बात मानी और न ही आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार हुए। बारिश, ठंड और फिर गर्मियों में भी किसान संगठनों से जुड़े लोग लगातार धरना-प्रदर्शन में जुटे रहे। हालांकि, उन्हें जश्न का मौका रविवार को तब मिला, जब पांच राज्यों के चुनाव परिणाम जारी हुए। पश्चिम बंगाल में भाजपा की करारी हार हुई। इस पर प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ भाजपा की हार हमारे लिए पहली महत्वपूर्ण जीत है, जो कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि, जनता ने भाजपा का अंहकार तोड़ दिया। भाजपा अपने दम पर सिर्फ असम में जीती। बंगाल जैसे बड़े राज्य में उसकी हार बताती है कि मतदाताओं के मत के आगे राजनीति पस्त हो ही जाती है।मालूम हो कि, चुनावों के वक्त, संयुक्त किसान मोर्चा के कई किसान नेताओं ने अपने भाजपा के खिलाफ प्रचार करने के लिए बंगाल का दौरा किया था। उन्होंने मतदाताओं से भाजपा का समर्थन नहीं करने की अपील की थी। अब जब भाजपा हार गई तो हरियाणा में धरना स्थलों पर मिठाइयाँ वितरित की जा रही हैं।
हरियाणा के भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, “अगले साल, पूरे देश के किसान इसे (सत्तारूढ़ भाजपा को) विधानसभा चुनावों में हराने के लिए उत्तर प्रदेश जाएंगे।” किसानों को संबोधित करते हुए एक वीडियो में चढ़ूनी ने कहा, “भाजपा सरकार का रिवर्स गियर शुरू हो गया है। भाजपा अब देश से गायब हो सकती है। “वहीं, जींद में भारतीय किसान यूनियिन के अध्यक्ष आजाद पलवा ने कहा, “बंगाल के परिणाम किसानों को और अधिक ताकत देंगे क्योंकि वहां हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभियान चलाया था। यह हमारी पहली बड़ी जीत है क्योंकि भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव को प्रतिष्ठा का मुद्दा बना दिया था।’

