ज्ञान की प्राप्ति की तड़प सदैव रहनी चाहिए- मुनि प्रशांत
जयगांव: मुनिश्री प्रशांत कुमार जी मुनिश्री कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में बसंत पंचमी के अवसर पर श्रुताराधना मंत्र अनुष्ठान आयोजित हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमार जी ने कहा – ज्ञान का बहुत महत्व है। ज्ञान का विकास हम सब के लिए बहुत जरुरी है। कभी भी ये नहीं सोचना चाहिए कि मुझे सब कुछ आता है। मैं सब जानता हूं।हम तो बिंदू मात्र भी नहीं जानते हैं। ज्ञान अनन्त है। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी अनेक बार कहते थे कि हमें ये सोचना चाहिए कि मैंने आज क्या सीखा प्रतिदिन कुछ नया सीखने जानने की ललक होनी चाहिए। जिसके मन में जिज्ञासा का भाव रहता है वो आगे बढ़ता है। जहां ज्ञान का अहंकार होता है वहां ज्ञान का विकास रुक जाता है।जब तक केवल ज्ञान नही हो जाता है तब तक हमारा ज्ञान अधूरा होता है। ज्ञान प्राप्ति की जिसके मन में तड़प होती है वो आगे विकास करता रहता है, ज्ञानावरणीय कर्म को क्षय करता है।सबके भीतर में ज्ञान है। ज्ञानावरणीय कर्म के बंधन से बचना चाहिए। ज्ञान, ज्ञानी एवं ज्ञान के साधन की आसातना से बचना चाहिए। ज्ञान विकास के मंत्रों का अभ्यास एवं जप रोजना करना चाहिए। भक्तामर स्तोत्र का छ: नम्बर का श्लोक का जप बुद्धि विकास के लिए बहुत उपयोगी होता है। ज्ञान का रास्ता प्रशस्त होता है। ज्ञान पंचमी के दिन उपवास या आयम्बिल के साथ जप करने से ज्ञानावरणीय कर्म का क्षयोपशम होता है। चौदह पूर्वी साधु का ज्ञान भी बहुत विराट होता है। सभा अध्यक्ष गणेश जी सरावगी ने मुनि द्वय के प्रति आभार व्यक्त किया।

