भूटान: मुनिश्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी का भूटान में एतिहासिक गुम्बा में लामा से वार्तालाप हुआ। मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – हम जैन साधु भगवान महावीर स्वामी की परम्परा के संत है। भगवान महावीर ने अहिंसा शांति को बहुत महत्व दिया।सभी प्राणी को जीने का अधिकार है।हम प्राणी मात्र के प्रति समानता का भाव रखें। किसी को मारना तो दूर मन वचन काया से सताना भी पाप है। भगवान महावीर ने विश्व के प्राणी मात्र के कल्याण का उपदेश दिया। भगवान महावीर एवं महात्मा बुद्ध समकालीन थे। महात्मा बुद्ध ने करुणा का संदेश दिया।हम जैन साधु विश्व भर में आजीवन पदयात्रा के माध्यम से स्वकल्याण के साथ पर कल्याण का उद्देश्य लेकर व्यक्ति व्यक्ति से सम्पर्क करके उन्हें सम्यक जीवन जीने की प्रेरणा देते है।आज भूटान आना हुआ। पवित्र स्थान माना जाता है। आचार्य श्री महाश्रमणजी का यहां आगमन हुआ था। भूटान के लोग शांतिप्रिय है। वातावरण स्वच्छ एवं साफ सुथरा है। यहां के वातावरण से हम अपने लिए प्रेरणा ले कि मन को शांत कैसे बनाएं।शांत मन से ही साधना हो सकती है।भारत का निकटवर्ती देश है भूटान दोनों देशों के बीच आत्मीयता सौहार्द का भाव बना रहे। नवनीत मिन्नी एवं मांगीलालजी बोथरा का प्रवास कार्यक्रम में योगदान रहा।

लामा ने भूटान एवं महात्मा बुद्ध के बारे में विस्तृत जानकारी दी। यहां के पवित्र वातावरण, स्थान के प्रभाव को बताते हुए कुछ प्रसंगों को उद्घाटित किया।

मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा – यहां का स्थान प्राकृतिक एवं रमणीय है। प्रकृति से हमें बहुत संदेश मिलता है। गुम्बा की कलात्मक अपने आप में बेजोड़ है।कला भी अपना महत्व है।हमारा जीवन कलात्मक बन जाएं। यहां के स्थान से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। शांति सुकुन साधना का आधार है।

