सिलचर (बर्धमान जैन): जैन धर्म में लोगस्स कल्प एक महत्वपूर्ण तीर्थ॔करों की स्तुतिहै। जिसका महत्व बहुत अधिक है। लोगस्स कल्प का अर्थ है “लोगों के लिए कल्प” यानि “लोक मंगल”। यह स्तुति जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा नियमित रूप से की जाती है। इसका उद्देश्य आत्म-शुद्धि, क्षमा, और अहिंसा की भावना को बढ़ावा देना हैजैन धर्म के प्राचीन शास्त्रों में लोगस्स कल्प का उल्लेख मिलता है। उपरोक्त विचार आचार्य श्री महाश्रमण जी के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री रमेश कुमार जी ने स्थानीय जैन भवन में “लोगस्स कल्प अनुष्ठान” के अवसर पर लोगस्स महत्व बताते हुए व्यक्त किये। लोगस्स कल्प आध्यात्मिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। इसमें चौबीस तीर्थंकर स्तुति की जाती है। जिससे आत्मा को उच्च बनाने और आत्म-विकास के लिए प्रेरित करती है। इसके साथ ही बीजाक्षरों सहित जप-ध्यान की विशेष साधना से जीवन में आने वाले विध्न बाधाऐं भी दूर होती है। लोगस्स कल्प में मंगल और शांति की भावना को बढ़ावा मिलता है। यह हमें मंगल और शांति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। इस अनुष्ठान को सफल बनाने में मुनि रत्न कुमार जी एवं तेरापंथी सभा के पदाधिकारियों का अच्छा परिश्रम रहा। मुनिश्री का सिलचर प्रवास प्रभावना के साथ आगे बढ़ रहा है यहा एक जनवरी 2026 को नये वर्ष पर महा मांगलिक के साथ विशेष मंत्र अनुष्ठान होगा। इस अवसर पर अनेक क्षेत्रों के श्रावकों की उपस्थिति संभावित है।

