तपस्वियों का अभिनन्दन

परिवार एवं समाज को बर्बाद करता नकारात्मक चिंतन -मुनि कुमुद

कांटाबांजी (वर्धमान जैन): मुनि कुमुद कुमार जी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा – बूरा मत देखो, बूरा मत बोलो, बूरा मत सुनो से अधिक महत्वपूर्ण तथ्य है कि बूरा मत सोचो‌। जिसने बूरा सोचने और नकारात्मक चिंतन को छोड़ दिया उसके सुनने, देखने और बोलने के दृष्टिकोण में परिवर्तन आ जाता है। नकारात्मक चिंतन तथा गलत सोच व्यक्ति, समाज एवं परिवार को बर्बाद कर देती है। जिसका दृष्टिकोण सम्यग् होता है वह दुख में से भी सुख ढूंढ लेता है। प्राचीन साहित्य एवं आगम ग्रंथों में महापुरुषों के जीवन दर्शन को पढ़ने पर हमें ज्ञात होता है कि उन्होंने कितने – कितने कष्टों को सम्यक् रुप से झेला लेकिन अपने सत्पथ, सत्कार्य से पीछे नहीं हटे।गलत चिंतन वाला व्यक्ति दूसरों का अहित बाद में करता है पहले अपना अहित कर लेता है।

एक छोटा सा गलत कदम कभी – कभी बहुत बडा अनर्थ कर देता है।जिस व्यक्ति के चिंतन में मैत्री, करुणा, सद्भावना होती है वहां धर्म घटित होता है। जीवन में आनंद पाना है, सुखी, शांति पूर्ण तरीके से रहना है तो अपने सोचने के नजरिए को सही बनाना होगा। आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा लिखित पुस्तक कैसे सोचे सफल जीवन का मार्गदर्शन करती है। दुख हर व्यक्ति के जीवन में आता है लेकिन धार्मिक व्यक्ति उसे सुख में परिवर्तित कर देता है। चिंतन हमारे मन को, भावों को एवं जीवन व्यवहार के साथ आचरण को भी प्रभावित करता है। शारीरिक , मानसिक एवं भावनात्मक बीमारी का एक कारण हमारी चिंतन शैली है। तपस्वी अजित, शंकर, रोहित, जयमाला, ज्योति एवं मीना ने तप करके अपने मन एवं इंद्रियों को वश में किया है।

अजित सेवाभावी धार्मिक आराधना करने वाला युवक है। रोहित ने पहली बार तप में जागरुकता के साथ कदम रखा है। शंकर ने एक साथ अट्ठाई का प्रत्याख्यान कर अटूट मनोबल का परिचय दिया है। जयमाला के बचपन के संस्कार साक्षात देखने को मिल रहे हैं। इस चातुर्मास में ज्योति ने ज्ञान एवं तप की ज्योति जलाई है। मीना जी ने छठी बार तप कर तप भावना को पुष्ट किया है। जहां तप- त्याग की चेतना जग जाती है वह आत्मसुख को पाता है। सभी धार्मिक परिवारों से हैं परिवार के संस्कारों एवं संतों की प्रेरणा व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। सभी तपस्वी धर्म के पथ पर आगे बढ़ते रहे।


मीडिया प्रभारी अविनाश जैन ने बताया – अजित -11 , शंकर -8 , रोहित -8 , श्रीमती जयमाला -9 , श्रीमती ज्योति -9 , श्रीमती मीना -8 ने तप का प्रत्याख्यान किया। तेरापंथ सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल एवं पारिवारिक सदस्यों ने गीत एवं वक्तव्य के द्वारा तपाभिनंदन किया। स्वयं तपस्वी अजित एवं शंकर ने अपनी भावों की अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। अनेकों श्रावक श्राविकाओं ने त्याग की भेंट मुनिवृंद को अर्पित की। तेरापंथ सभा द्वारा साहित्य एवं पचरंगी दुपट्टा द्वारा तपस्वियों का सम्मान किया गया।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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