पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई वार्ता में प्रधान सचिव ने पूर्व के सहमत बिंदुओं को भी मानने से किया इन्कार

पटना (रामजी प्रसाद): बिहार लोकल बॉडीज कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सिंह, श्यामलाल प्रसाद, अमृत प्रसाद, रामयत्न प्रसाद, मंगल पासवान, अशोक कुमार सिंह, आर एन ठाकुर, शिव बच्चन शर्मा, चन्द्र किशोर एवं नीरज वर्मा ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया कि पटना नगर निगम सहित राज्य के अन्य नगर निकायों के करीब 40 हजार कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के सातवें दिन भी डटे रहे। फलस्वरूप अन्य कार्यों के अतिरिक्त सफाई व्यवस्था पूर्ण रूप से ठप रही। वर्षों से कार्यरत दैनिक कर्मियों की सेवा को नियमित किए जाने एवं बिहार नगर पालिका अधिनियम- 2007 में नगर निकायों की स्वायत्तता समाप्त करने संबंधी संशोधन को रद्द करने तक हड़ताल जारी रहेगी।


चन्द्र प्रकाश ने यह भी जानकारी दी है कि माननीय पटना उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में निकाय कर्मियों की 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रधान सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग के स्तर पर कल दोपहर 3:00 बजे हुई द्विपक्षीय वार्ता मैं प्रधान सचिव ने पूर्व के रहमत बिंदुओं को भी मानने से इनकार कर दिया । वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आपकी बातों को सुन लिया गया है। सरकार एक माह के बाद अपना निर्णय देगी। हालांकि इसके पूर्व संघर्ष मोर्चा के नेताओं की भी बैठक 11:00 बजे दिन में हुई। बैठक में पटना उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया गया और यह तय किया गया कि प्रधान सचिव के यहां आयोजित बैठक से लौटने के बाद उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में हड़ताल के संबंध में समुचित निर्णय लिया जाएगा। परंतु प्रधान सचिव की बेरुखी एवं एक तरफा संवाद के बाद हड़ताली नेताओं के पास हड़ताल को जारी रखने के अलावे कोई दूसरा विकल्प नहीं रह जाता है।


संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने यह भी कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के पूर्व एवं वर्तमान आदेश का भी नगर विकास विभाग ने सम्मान नहीं किया है। और अभी भी दैनिक कर्मियों की मांगों को लेकर टालमटोल की नीति अपनाई जा रही है। यह निगम के सफाई कर्मियों के लिए खुशी की बात है कि माननीय उच्च न्यायालय ने इनकी वित्तीय मांगों को जायज बताया है। नगर निकाय के हजारों सफाई मजदूर हृदय से उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं। परंतु सरकार के रवैयै को ध्यान में रखते हुए हड़ताल को जारी रखना उनकी मजबूरी हो गई है। बिहार के दलित एवं वंचित वर्ग से आने वाले सफाई कर्मियों के लिए यह दुर्भाग्य की बात है कि मुख्य मंत्री अथवा नगर विकास मंत्री के द्वारा इस हड़ताल से उत्पन्न स्थिति को लेकर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। निगम मुख्यालय मौर्य लोक में हड़ताली कर्मचारियों को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि महागठबंधन की सरकार 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वायदा को नगर निकाय के दलितों , वंचितों एवं सफाई कर्मियों की नियुक्ति कर इसे प्रारंभ करें।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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