ध्यान एवं योग से होता है जीवन में रुपांतरण – मुनि प्रशांत
कांटाबांजी (वर्धमान जैन): मुनि प्रशांत कुमार जी, मुनि कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में एवं ध्यान योग प्रशिक्षक मुकेश गिरिया के निर्देशन में तेरापंथ सभा द्वारा शिविर का आयोजन हुआ। शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा – व्यक्ति का मन चंचल होता है। मन व्यक्ति को विचलित कर देता है। मन की सुनने वाला, मानने वाला बाहरी दुनिया में भटकता रहता है।

जो व्यक्ति आत्मा की सुनता है, आत्मा का चिंतन करता है वह आत्मा को विशुद्ध बना देता है। आत्मा का ध्यान करें। ध्यान का मतलब बाहरी दुनिया से सम्पर्क छोड़ कर आत्मा से आत्मा को देखना। आत्मदर्शन का पहला प्रयोग है श्वास दर्शन। श्वास जितना दीर्घ होता है चंचलता, आवेश, आवेग उतना ही कम होता है। आत्मस्थ व्यक्ति ही परमानंद को प्राप्त करता है आत्मा का मूल स्वभाव शांति, क्षमा, संतोष, मैत्री एवं करुणा होता है। ध्यान साधना का प्रथम एवं अंतिम चरण होता है। उसके द्वारा ही भाव एवं स्वभाव को बदला जा सकता है। आसन, प्राणायाम,योग ये विधियां मन को ध्यान की तरफ जोडती है।

योग एवं ध्यान प्रशिक्षक मुकेश गिरिया ने कहा – योग एवं ध्यान भारत की प्राचीन पद्धति रही है योग से शारीरिक स्वास्थ्य ठीक रहता है व्यक्ति बीमारियों से दूर रहता है। ध्यान से व्यक्ति मानसिक एवं भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहता है। प्राणायाम करने से प्राण शक्ति मजबूत होती है। ध्यान हमें अपने आप से जोडती है, भीतर में जाने की प्रक्रिया है। हास्य योग से शरीर,मन प्रसन्न रहता है। वर्तमान के साथ जुड़ने की पद्धति है। जो भी हो रहा है उसको स्वीकार करने की मानसिकता बनती है। जहां सहज प्रसन्नता नहीं होती है वहां हास्य योग का सहारा लिया जाता है। तेरापंथ सभा के मीडिया प्रभारी महेंद्र जैन ने बताया कि योग प्रशिक्षक मुकेश गिरिया ने योग एवं ध्यान के विभिन्न प्रयोग करवाएं। हास्य योग के द्वारा लोगों ने जीवन जीने का आनंद लिया। जीवन में योग एवं ध्यान का कितना महत्व होता है ये प्रायोगिक रुप से करने से पता चलता है। सभा मंत्री सुमीत जैन ने स्वागत किया। महासभा अध्यक्ष मनसुख सेठिया ने मोमेंटो के द्वारा सम्मानित किया। सभा अध्यक्ष युवराज जैन ने साहित्य एवं रायचंद जैन ने पचरंगी दुपट्टा से सम्मान किया। आभार ज्ञापन सभा मंत्री सुमीत जैन ने किया।

