सुरक्षा के साथ समझौता नही, 4 वर्ष की जगह 15 वर्ष हो अग्निवीरों कि सेवा -अत्रि

पटना: राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव, पूर्व सैनिक नीरज कुमार अत्रि ने बताया कि रक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सैनिकों को देश रक्षा की दाइत्व से हटा कर, भारतीय सेना को एक सरकारी मुलाजिम बनाना चाहती है. आगे उन्होंने ने बताया सैनिकों की जिंदगी गुजर गई, देशवासियों को खुश करने में! जो खुश हुऐ वो अपने कहाँ थे, जो अपने थे वो खुश हुए ही नहीं . समझा जाय यदि खुद से बहस करें तो सभी प्रश्नो के जवाब मिल जाते हैं, पर दूसरों से करेंगे तो नये प्रश्न खडे हो जाते हैं. इसी क्रम में हम अपनी गलती का अधिवक्ता और दूसरों की गलतियों का जज बन जाते हैं, तो फैसले नहीं फासलें हो जाते हैं. आगे बताते चलें भारतीय सेना में नूतन भर्ती प्रक्रिया अखबारों और शोसल मिडिया पर देश भर में चर्चा जोरों पर हो रही है . सेना के जवान अब सैनिक नहीं अग्नि वीर कहलाऐंगे. वे बहाल मात्र चार साल के लिए किऐ जाऐंगे . उसके बाद उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा. सेवारत जवानों से मात्र पचीस प्रतिशत को सेवा विस्तार दिया जाऐगा. यह विस्तार उनके सेवा अवधी के दौरान किऐ उत्कृष्ट कार्य पर र्निभर होगा? यहाँ सेवा विस्तार समय रूपये लेन -देन की बात से इंकार नहीं किया जासकता है, जिसका परिणाम अच्छा नहीं होगा. लेन – देन की बात प्रमाणित होने पर अधिकारी और अग्नि वीरों के बीच फासले बढेंगे और कोर्ट- मार्शल तक फेस करने की नौबत आ सकती है. नूतन भर्ती प्रक्रिया बहुत ही पेचीदा होगा.एक तरफ नवयुवकों का भविष्य अंधकार की ओर बढ रहा है तो दूसरी तरफ सेवा में उनके जोश, जुनून और जज्बा का लाभ देश नहीं उठा पाएगा सरकार के तरफ से उन्हें पुन:रोजगार की गारंटी दिऐ जाने की कोई बात नहीं कही गई है . पुन:रोजगार नहीं उपलब्ध नहीं होने पर उनके परिवार के सामने भूखमरी की विकट समस्या उत्पन्न होने की प्रबल संभावना बलवंत होगी. परिवार की भरण – पोषण के खातिर असामाजिक तत्वों के साथ गठजोड भी करने पर विवस हो सकेंगे . सेना में अग्नि वीरों की बहाली तो दिखावा है. असली कार्य तो भविष्य में सैनिकों की तन्ख्वाह को कम करना और पेंशन पर हो रहे सरकारी खर्च को बंद करना है. जिस तरह अन्य सरकारी विभागों में अनुबंध पर कर्मचारी बहाल किऐ जारहे है ठीक उसी तरह सेना में अनुबंध पर बहाल किये जाने की पहली एक्सप्रिमेंट की योजना पेश अग्नि वीर. सैनिकों और अग्नि वीरों के बीच समान कार्य समान तन्ख्वाह और भत्तों के लिए विवाद उत्पन्न हो सकता है. राजनेताओं और व्यूरोक्रेटस को लगता है कि सबसे अधिक देश के सैनिकों के तन्ख्वाह और पेंशन पर खर्च सरकार का हो रहा है, शेष लोग तो देश पर परोपकार स्वरूप श्रमदान कर रहे हैं. उसके एवज में वे नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं. कोई तो है जो देश की रक्षातंत्र को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश रच रहा है और निरंतर देश को ही नहीं सैनिकों की प्रतिष्ठा, मान-सम्मान और उनकी प्रदत सरकारी मिलने वाली सुविधाओं पर आऐ दिन कडे प्रहार किये जा रहे हैं. सरकार को सैनिक वीरोधी पनपते मानसिकता पर गौर करने की जरूरत है. एक तरफ होली और दीवाली में सैनिकों का मनोबल बढाने के लिए उनके साथ खडे होते है तो दूसरी तरफ उनकी सुख सुविधाओं पर कैंची चलाने से परहेज नहीं करते है. सैनिक जिन परिस्थितियों में दिन-रात सीमा पर कार्यरत रहते हैं उन्हें दुश्मनो के सामने खुद फैसला करने के लिए चंद सेकेंडों का समय मिलता है यही वह क्षण होता है कि भारतीय सैनिक की गोली पहले चले या दुश्मनों की गोली से शहीद हों, इस तरह की धटना अधिकतर धनधोर जंगल और कठिन पहाडियों पर रात के अंधेरों में होती है, उनके सामने त्वरित कार्यवाही करने के लिए र्निणय लेना पडता है . सैनिक अपने जीवन का क्रिम समय देश की सुरक्षा में देता पर अफसोस है कि उनके हितों की रक्षाकी जब बात आती है तो सरकार मुख र्दशक बन तमाशा देख रही होती है. और आगे विचारणीय है कि पाकिस्तान और चीन भारत से यदि कोई दुस्साहस करने का हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है तो उसके पीछे का कारण भारत बंगला देश, कारगिल और गलवान धाटी के युद्ध में भारतीय सैनिकों का जोश, जुनुन, जज्बा और शौर्य पराक्रम रहा है .याद रखना होगा! कोई देश तभी तक सुरक्षित रहता है जब तक उसकी सैन्य शक्ति मजबूत होती है.सरकार अपने सैन्य तकत को किसी के निजी हाथों सौपने से परहेज करे और चार साल के बजाय 15 वर्षों की सेवा बहाल करे उसके बाद सेवा विस्तार चाहने वालों को विस्तार करे और न चाहने वालों को सेवानिवृत्त.

 

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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